State Bank of Mysore

Trusted Service

Acts Codes and Policies

अधिनियम,संहिता एवं नीतियाँ

1. निष्क्रिय/अदावेकृत जमा खातों पर नीति

2. केंद्रीय सांविधिक लेखापरीक्षकों की नियुक्ति पर नीति

3. वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए केंद्रीय सांविधिक लेखापरीक्षक

4. प्रधान कार्यालय एवं विभिन्न क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारियों का विवरण- आनलाईन शिकायत अनुसरण प्रणाली

5. चेक संग्रहण नीति

6. उधारकर्ताओं के लिए उचित व्यवहार्य नीति

7. बैंक की उचित व्यवहार्य नीति

8. जमा पर आदर्श नीति

9. वसूली एजेंटों की सूची

10. पैनलगत मूल्यांककों का विवरण

11. कार्पोरेट गवर्नेन्स

12.कार्पोरेट गवर्नेन्स- नीतिशास्त्र

13. धन शोधन निवारक(ए एम एल)

14.के वाई सी अनुपालन- हमारे ग्राहकों को सूचना

15. सूचना अधिकार नियम 2005

16. एस बी आई (अनुषंगी बैंक)अधिनियम 1959

17.ग्राहकों को प्रतिबद्धता नियम(बी सी एस बी आई)

18.बैंक की नीति –एम एस ई ग्राहकों को प्रतिबद्दता

19.बैंकिंग लोकपाल योजना 2006

20.बैंकिंग लोकपाल –बैंक के नोडल अधिकारियों की सूची

21. क्षतिपूर्ति नीति

22. देय राशि की वसूली और प्रतिभूति का पुनर अधिग्रहण नीति

23. वैयक्तिक खंड- दंडात्मक ब्याज नीति

24. ग्राहक शिकायत निवारण नीति

25. पर्दाफाश नीति(व्हिसिल ब्लोअर नीति)


1.निष्क्रिय/अदावेकृत जमा खातों की/पर नीति

.उद्देश्य

 बैंकिंग विनियमन 1949 की धारा 26 की शर्तों में,अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा गया है कि प्रत्येक बैंकिंग कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक  को, प्रस्तावित फार्म में ऎसे खातें जिनका 10 वर्षों से संचालन नहीं किया गया है,तत्संबंधी एक विवरणी प्रत्येक वर्ष 31दिसंबर को 30 दिनों के भीतर भेजा जाना चाहिए ।


वर्ष दर वर्ष अदावेकॄत जमा की राशि में वृद्धि एवं ऎसी जमा के साथ आंतरिक जोखिम को ध्यान में रखते हुए,यह महसूस किया गया है कि ऎसे खाताधारक जिनकी राशि अदावेकॄत है उनके विषय मॆं पता लगाने के लिए सक्रिय भूमिका निभायी जाए ।बैंक के वेबसाईट पर निरंतर समीक्षा एवं अदावेकृत जमा की सूची प्रदर्शित की जानी चाहिए । इसका मुख्य उद्देश्य है कि ग्राहक को बिना किसी परेशानी के  उनके हक की सेवा मिलनी चाहिए ।यह दस्तावेज अदावेकृत जमाराशि से लेनदेन के संबंध में बहुत पारदर्शिता प्रदान करेगा और ग्राहकों के बीच उनके अधिकार के लिए जागरूकता प्रदान करेगा ।समय समय पर भा. रि बै. द्वारा जारी निदेशों के अनुरूप,बैंक द्वारा जारी वर्तमान निर्देशों के साथ नीति को पढा जाना चाहिए ।


2.परिभाषा

बचत  या चालू खाते तभी निष्क्रिय के रूप में परिभाषित किया जाता है अगर उस खाते में एक वर्ष के दौरान कोई लेन देन नहीं किया गया हो ।उसी प्रकार, दोनों प्रकार के खातों को अपरिचालित माना जाता है अगर दो वर्षों के दौरान कोई लेनदेन नहीं किया गया हो ।बैंकिंग विनियमन 1949 की धारा 26 के अनुसार में ऎसे खाते जो 10 वर्षों से अपरिचालित है,वे अदावेकृत जमा खाते में आ जाते हैं ।

 3.खातों का वर्गीकरण

 किसी खाते को निष्क्रिय वर्गीकृत करने के लिए लेनदेन के दोनों प्रकार अर्थात ग्राहकों के  नामे जमा के साथ जमा लेन-देन एवं तीसरी पार्टी के उदाहरण को देखकर विचार किया जा सकता है ।पुन: स्पष्टीकरण किया गया है कि ग्राहक के आदेशानुसार  सावधि जमा खाते पर ब्याज बचत  बैंक खाते में जमा किया जाता है,अत: बचत बैंक खाते को सक्रिय माना जाएगा जब तक सावधि जमा खाते पर ब्याज बचत  बैंक खाते में जमा किया जाता है ।बचत बैंक खाते को सावधि जमा खाते पर ब्याज की अंतिम जमा प्रविष्टि की तिथि से केवल दो वर्षों के बाद निष्क्रिय खाते के रूप में माना जा सकता है ।


4.बैंक के वेबसाईट में दस वर्षों से अधिक अदावेकृत/निष्क्रिय खातों के विस्तार का प्रदर्शन

भारिबै परिपत्र –भारिबै/2011-12/89 डीबीओडी सं.ल.बीसी81/09.07.005/2011-12 दि.07/02/2012  के अनुसार बैंक के वेबसाईट www.statebankofmysore.co.inमें दस वर्षों से अधिक अदावेकृत/निष्क्रिय खाते की सूची प्रदर्शित की गयी है ।प्रदर्शित की गयी सूची में अदावेकृत जमा/निष्क्रिय खाताधारकों  के नाम, पते दिये गये हैं ।  अदावेकृत खातों की सूची का प्रोफार्मा संलग्नक-I में दिया गया है ।इस सूची को प्रत्येक वर्ष 31मार्च को अद्यतन किया जाना चाहिए ।


5.दस वर्ष और अधिक के लिए  अदावेकृत/निष्क्रिय को उत्प्रेरक

खाताधारक निम्न दस्तावेजों के साथ अदावेकृत खाता को सक्रिय करने के लिए शाखा को संपर्क कर सकते हैं -

1)मूल एस बी/सी ए/आर डी पासबुक/टी डी आर.

2)खाताधारकों के हस्ताक्षर के साथ उनकी दो अद्यतन पासपोर्ट साइज फोटो,

  1. के वाई सी दस्तावेजों में से किसी एक उनके पहचान पत्र जैसे पासपोर्ट,पैन कार्ड,विटर आई डी,ड्राइविंग लाइसेंस,एवं पहचान पत्र.
  2. के वाई सी दस्तावेजों में से किसी एक उनके पता प्रमाणपत्र जैसे टेलिफोन बिल,बैंक खाता विवरणी,जिसमें गत तीन महीने से कम से कम एक लेनदेन हुआ हो ।नया बिजली बिल,राशन कार्ड,और नियोक्ता से पत्र(बैंक की संतुष्टि के लिए)।


6.निष्क्रिय खातों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश


1) ग्राहक को खाते में परिचालन के लिए कोई भी असुविधा नहीं होनी चाहिए क्योंकि            उनके खाते को निष्क्रिय समझा गया है ,यह बैंक के आंतरिक सुरक्षा के लिए है ।


  1. बचत बैंक खाते में ब्याज को निष्क्रिय/अप्रिचालित खातें में            लगातार जमा किया   जाना चाहिए ।
  2. निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने के लिए कोई प्रभार नहीं लगाया जाएगा ।
  3. शाखाओं को सूचित किया जाता है कि प्रत्येक वर्ष 31मार्च को  सभी निष्क्रिय खातों -बचत एवं चालू दोनों को बिना बकायाराशि को देखे हुए समीक्षा की जानी चाहिए।
  4. निष्क्रिय खातों में परिचालन लेनदेन हस्ताक्षर का सत्यापन एवं पहचान की सत्यता  जानने के बाद किया जाना चाहिए ।
  5. प्रिचालित/निष्क्रिय/अदावेकृत जमा खाते में पहला नामे जमा शाखा द्वारा किया जाना चाहिए।

7.दावे की प्रक्रिया


क)ग्राहक से दावे: ग्राहक अपने नजदीकी शाखा को जा सकते हैं और    अपने आवेदन को अच्छी तरह भरकर वैद्य पहचान अर्थात खाता का सबूत जैसे एस बी/आर डी पास बुक,टी डी आर/आर आई डी रसीद इत्यादि के साथ दावे का निपटारा किया जा सकता  है ।

ख) वैद्य वारिस/नामिती से दावे :दावे प्रक्रिया के लिए वैद्य वारिस  अपने आवेदन को पूरी तरह भरकर हस्ताक्षरित कर निम्न दस्तावेजों के साथ किसी निकट शाखा से संपर्क कर सकता है :-

*दावेदारी के वैद्य पहचान सबूत

*जमाकर्ता के मृत्युप्रमाणपत्र की प्रति।


शाखाएँ वैद्य वारिस/नामिती के देय को ,मृत व्यक्ति के खाते के संबंध में दावे के निपटान के लिए बैंक द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है ।


ग)अन्य संस्था से दावे:अन्य खातों के दावों के लिए आवेदन पत्र प्राधिकृत अधिकारी के वैद्य पहचान सबूत के साथ   प्रस्तुत किया जाना चाहिए ।दावे के  प्रस्तुतीकरण के समय मूल दस्तावेज को शाखा में सत्यापन के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए ।


8.शिकायत एवं परिवाद का निवारण -ग्राहक बैंक द्वारा शिकायत/परिवाद के निपटारे के लिए अधिकृत प्राधिकारी तक जा सकते हैं ।शाखा परिसर में आंतरिक संरचना को प्रदर्शित किया जाना चाहिए ।शाखा अधिकारी को शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया  को बतानी चाहिए ।अगर जमाकर्ता को बैंक में शिकायत दर्ज  करने के एक महीने के भीतर कोई उत्तर नहीं मिलता या शिकायत अस्वीकार किया जाता हैया वह बैंक के उत्तर से संतुष्ट नहीं है तो  उसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त बैंकिंग  लोकपाल के पास जाने का  पूरा अधिकार है ।


9.नीति की समीक्षा

नीति अनुमोदन की तिथि से एक वर्ष के लिए लागू रहेगी ।

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9. प्रवर्तन /वसूली एजेंटों की सूची

क्रम सं.

एजेंसी का नाम

टेलिफोन/फैक्स सं के साथ पता

परिचालन का क्षेत्र

1

डेट रिकवरी सक्वायड

19,कोकोनट एवेन्यू रोड,8वा क्रास,मल्लेश्वरम,बेंगलूर-560003

दूरभाष: 233317461

मोबाईल सं.9448065064

9448063461

कर्नाटक

2

ए ई जी आई एस

ई-241,ग्रैटर कैलाश-1,

नयी दिल्ली-110048

दूरभाष:011-26420199

फैक्स:011-26448711

ईमेल: This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it


उत्तर भारत

3

आई टी सी ओ टी लि.(तमिलनाडु लि. का औद्योगिक एवं तकनीकि कं.संगठन)

चेन्नै

तमिलनाडु,मुम्बई

4

अब्राहम इंडस्ट्रियल सर्विसेज

अब्राहम हाउस,24-96/2/4,आनंद बाग  X रोड,मल्काजगिरी,हैदराबाद-500047

दूरभाष:040 27227069

फैक्स:27223718


आंध्रप्रदेश

5

ए पी आई टी कं.लि.

8वा तल, परिश्रम भवनम,बशीरबाग,हैदराबाद-

दूरभाष:040-23237333,23237981

फैक्स:04023298945



आंध्रप्रदेश



6

मृत्युंजय इंवेस्टिगेटर,हुबली

माल्वाडे बिल्डिंग,गणेश टेम्पल,चैतन्य नगर,

गोकुल रोड,हुबली

कर्नाटक

7

आस्ति वसूली प्रबंधन यार्ड(पी)लि.

3-4,529/2/5,नारायणगुडा,

हैदराबाद-500027

कर्नाटक,तमिलनाडु,आंध्रप्रदेश,

केरल,महाराष्ट्र,

8

वसूली रिकवरी प्रा.लि.कंपनी

#ए- 1,16,

अस्मिता काप.हाउसिंग सोसाईटी,मलाड पश्चिम,

मुम्बई-400068

दूरभाष-  022-32455660

फैक्स-   022-28633999

(मो) 9324590999


सभी राज्य

9

मेसर्स शिशिर व रवि एसोसियेट

#106,भरत टावर्स,5वाँ लेन,द्वारकानाथ,

विशाखापटनम-530016

दूरभाष- 2538358,3504386

फैक्स-0891 2704065

सभी राज्य

10

मेसर्स मेटेक्स नेट प्रा.लि.कंपनी

#3266,11वाँ मेन,एच ए एल IIरा स्टेज,

इंदिरानगर,बेंगलूर-560008

दूरभाष-08025215488/89/90/91

फैक्स-080 25285057

सभी राज्य

11

मेसर्स टैलबोट आस्ति प्रबंधन व संरचना प्रा. लि.

आवासीय पता :

# 10 डी,ओरियन्ट रो,

कोलकाता- 700017

टी)- 9103322891270

9103332578289

फैक्स-  91033322833175

पश्चिम बंगाल

12

मेसर्स इंवेन्ट ए आर सी प्रा. लि.

प्रा. लि.कं.

# 7,रहेजा सेन्टर,

भूतल,

214, फ्री प्रेस जर्नल मार्ग,

नरिमन प्वांइट, मुम्बई-400021

टी) –910333295 1848/32407486

(टे-फै)-91033 24863287

पश्चिम बंगाल,नयी दिल्ली व हरियाणा


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11. निगमित प्रशासन (कॉरपोरेट गवर्नेंस)

निगमित प्रशासन- आचार संहिता

I.कोड का उद्देश्य और आवश्यकता

कारपोरट प्रशासन के हिस्से के रूप में स्टॉक एक्सचेंजों के साथ लिस्टिंग में प्रविष्ट करार के खण्ड 49 के अनुसार सूचीबद्ध संस्थाओं को निदेशकों के लिए और उच्च प्रबंधन बोर्ड के निदेशकों के लिए आचार संहिता का निर्माण किया जाना है।

तदनुसार बैंक अपने सेंट्रल बोर्ड के निदेशकों के लिए कोड का निर्माण किया है। उच्च प्रबंधन का मतलब है महाप्रबंधक स्तर के बैंक के शीर्ष अधिकारी)

II बैंक की विश्वास प्रणाली

यह आचार संहिता मार्गदर्शक सिद्धांत है बैंक के परिचालन में  और अपनी बहुसंख्यक हितधारकों, सरकार और नियामक एजेंसियों, मीडिया तथा अन्य संबंधितों द्वारा पालन किये जायेंगे। इससे पता चलता है कि बैंक सार्वजनिक धन के न्यासी, संरक्षक है और  अपने प्रत्ययी दायित्वों व जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर जनता के विश्वास को कायम रखता है।

बैंक में हर लेन – देन की विश्वासनीयता को बनाए रखने की जरूरत है और यह मानना ​​है कि  अपनी आंतरिक आचरण में ईमानदारी, निष्ठा के संबंध में अपने बाहरी व्यवहार से फैसला किया जाएगा। बैंक को देश हित में संचालित करने के लिए अपने सभी कार्यों में प्रतिबद्धता दर्शाना है। बैंक  अपने ग्राहकों व बड़े पैमाने पर जनता के प्रति अपनी दायित्वों के निर्वाह और प्रतिष्ठा के प्रति जागरूक रहेगा तथा उसमें सुधार लिए निरंतर प्रयास करेगा। बैंक अपने नीतियां  जो ग्राहक केंद्रित हैं को विवेकपूर्ण वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जारी रखेगा।

III.संहिता के तत्व

कोड की परिकल्पना एवं उम्मीद

क-  ईमानदार और नैतिक आचरण सहित, वास्तविक या स्पष्ट व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों के बीच हितों का टकराव से निपटने में उचित और नैतिक प्रक्रियाओं के उच्चतम मानकों के पालन।

ख-  समय – समय पर बैंक द्वारा सरकार और नियामक एजेंसियों के साथ दर्ज आवश्यक रिपोर्ट में पूर्ण, निष्पक्ष और सटीक खुलासे।

ग--लागू कानूनों, नियमों और विनियमों के अनुपालन।

घ--बैंक की संपत्ति और संसाधनों के दुरुपयोग रोकना।

च- गोपनीयता और निष्पक्षता के उच्चतम स्तर को प्राप्त करना।

छ- बैंक के भीतर और बाहर आपने व्यवहार में गोपनीयता एवं निष्पक्ष व्यवहार बनाये रखेगा।

अ- आचरण के सामान्य मानक

बैंक के उच्च प्रबंधन के सभी निदेशक और सदस्य अपने अच्छे निर्णय  से  यह उम्मीद करता है की ग्राहकों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की सुरक्षा व कल्याण सुनिश्चित करने तथा एक सहकारी, कुशल, सकारात्मक, सामंजस्यपूर्ण और उत्पादक कार्य वातावरण और व्यापार संगठन को बनाए रखने हेतु कार्य करेंगे। उच्च प्रबंधन के निदेशक और सदस्य उनके कार्यालय के कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी के साथ करना चाहिए। एक साधारण व्यक्ति जिसप्रकार अत्यंत सावधानी और विवेकपूर्ण रूप से उसकी / उसके स्वयं के व्यवसाय में कार्य करता है, उनसे उसप्रकार से रूचि लेने की उम्मीद है। यह बैंक के परिसर में काम के लिए लागू होने के साथ साथ बाहार भी, भारत में या विदेश में बैंक द्वारा प्रायोजित और सामाजिक घटनाओं पर व्यवसाय में, या किसी अन्य जगह पर, स्थानों पर भी लागू है।

आ- हितों का संघर्ष

हित का संघर्ष तब होता है जब निदेशक मंडल के किसी भी सदस्य की और कोर प्रबंधन के निजी हित हस्तक्षेप या बैंक के हितों के साथ किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने के लिए प्रकट होता है। शीर्ष प्रबंधन के हर सदस्य हितधारकों के लिए और एक दूसरे के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि यह कर्तव्य उन्हें व्यक्तिगत लेनदेन और निवेश में उलझाने से नहीं रोकता है, परंतु यह मांग करता है कि वे जहां ब्याज की एक संघर्ष हो सकता है, ऐसी स्थितियों से बचने की आवश्यकता है। उनसे यह उम्मीद है कि, अपने कर्तव्यों का पालन करने में बैंक के हित के साथ संघर्ष न हो।

रोजगार / बाहरी नियोजन – यह उम्मीद है कि कोर प्रबंधन के सदस्य बैंक के व्यावसायिक हितों के लिए अपने पूरा ध्यान समर्पित करें।  ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों, जो  उनकी जिम्मेदारी अथवा निष्पादन के साथ हस्तक्षेप करे या अन्यथा बैंक के व्यवसाय हित के साथ संघर्ष हो।

व्यवसाय हित – यदि निदेशक बोर्ड और उच्च प्रबंधन बैंक के कोई सदस्य ग्राहक, आपूर्तिकर्ता, या प्रतियोगी द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश करना चाहते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सदस्य, इन निवेश की वजह से अपनी जिम्मेदारियों के साथ समझौता नहीं करते। उनके बैंक के फैसले को प्रभावित करने की क्षमता, निवेश व आकार सहित बहुत से तत्त्व जैसे कि उनके बैंक की गोपनीय जानकारी तक पहुँच, या अन्य पहचानते, बैंक व ग्राहक, आपूर्तिकर्ता, या प्रतियोगी के बीच संबंधों की प्रकृति आकार और निवेश की प्रकृति सहित कई कारकों निर्धारित करते हैं, हित को बाधित करनेवाले तत्व पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त,  बैंक के  हित में वे बैंक के व्यापार को बाधित करनेवाला कोई विषय हो तो खुलासा करना चाहिए।

संबंधित पार्टी- एक सामान्य नियम के तहत, उच्च प्रबंधन के निदेशक सदस्य अपने रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति या किसी भी फर्म, कंपनी एसोसिएशन, जिसमें रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति किसी भी महत्वपूर्ण भूमिका में जुड़ा हुआ है के साथ व्यापार के संचालन से बचना चाहिए। रिश्तेदार से मतलब है:
पिता
मां (सौतेली माँ सहित)
बेटा (सौतेले बेटे सहित)
बेटे की पत्नी
बेटी (सौतेली बेटी सहित)
पिता के पिता
पिता की माँ
माँ की माँ
माँ के पिता
बेटे के बेटे
बेटे के बेटे की पत्नी
बेटा की बेटी
बेटे की बेटी के पति
बेटी का पति
बेटी के बेटे
बेटी के बेटे की पत्नी
बेटी की बेटी
बेटी की बेटी का पति
भाई (सौतेले भाई सहित)
भाई की पत्नी
बहन (सौतेली बहन सहित)
बहन के पति
पति/ पत्नी
यदि संबंधित पार्टी लेनदेन अपरिहार्य है, वे पूरी तरह से उपयुक्त प्राधिकारी के लिए संबंधित पार्टी लेनदेन की प्रकृति का खुलासा करना चाहिए। संबंधित पार्टी के साथ किसी भी सौदे इस तरह है की जाए कि कोई अधिमान्य व्यवहार न हो।

किसी अन्य लेन – देन या हितों के बाधित करने की स्थिति के मामले में, उपयुक्त प्राधिकारी इसके प्रभाव पर विचार – विमर्श से फैसला करना चाहिए।

इ-लागू कानून

बैंक का शीर्ष प्रबंधन एवं निदेशक लागू कानून, विनियमों, नियमों और विनियामक आदेश का पालन करना चाहिए। वे अनुपालन में कोई चूक हुई हो तो, बाद में पता चलने पर संबंधित प्राधिकार को रिपोर्ट करना चाहिए।

ई- प्रकटीकरण मानक
बैंक को सरकार और नियामक एजेंसियों को प्रस्तुति हेतु आवश्यक आवधिक रिपोर्टों में पूर्ण, निष्पक्ष और सूचना का खुलासा करेगा। निदेशक मंडल, लेखा परीक्षक और अन्य सांविधिक एजेंसियों के द्वारा आवश्यक सभी सूचना को उपलब्ध कराने के लिए शीर्ष प्रबंधन व सदस्य कार्य करेंगे।

उ- बैंक आस्तियों और संसाधन का प्रयोग :
शीर्ष प्रबंधन और निदेशक मंडल के प्रत्येक सदस्यों को बैंक के प्रति बैंक की संपत्ति व संसाधनों के व्यवहार में बैंक हित को ध्यान में रखना चाहिए।

बैंक की संपत्ति और संसाधनों के व्यवहार में किसी भी व्यक्ति से याचना, मांग, स्वीकार या किसी भी व्यक्ति से मूल्य को स्वीकार करने के लिये सहमत  होने
किसी भी लेन – देन में जो वे या उनके रिश्तेदार (ओं) के किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में व्यक्तिगत लाभ के लिए कार्पोरेट संपत्ति जानकारी या पद का उपयोग करने से शीर्ष प्रबंधन को निषेधित करता है।

ऊ- गोपनीयता और निष्पक्ष व्यवहार

1 बैंक की गोपनीय जानकारी

>>> बैंक की गोपनीय जानकारी एक मूल्यवान संपत्ति है। यह सभी व्यापार संबंधित जानकारी, व्यापार रहस्य, गोपनीय और विशेषाधिकार से प्राप्त जानकारी, ग्राहक जानकारी, कर्मचारी से संबंधित जानकारी, रणनीतियों, प्रशासन, बैंक और वाणिज्यिक, कानूनी, वैज्ञानिक, तकनीकी डेटा है या प्रदान की जाती है अनुसंधान शामिल है या उपलब्ध कराई गयी है निदेशक मंडल और बैंक में अपनी स्थिति के कारण प्राप्त सूचना जो कागज प्रपत्र या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्राप्त है, सभी गोपनीय जानकारी को बैंक के व्यापार केवल प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


>>> इस जिम्मेदारी सुरक्षा, सुरक्षा और रिकॉर्ड बनाए रखने तथा प्रबंध पर बैंक की नीति के अनुसार गोपनीय जानकारी का उचित निपटान शामिल है। यह दायित्व तृतीय पक्ष, जो बैंक हक गैर प्रकटीकरण समझौते के तहत प्राप्त गोपनीय जानकारी पर भी लागू होती है। >>> बैंक व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए गोपनीय जानकारी, संभावित व्यापार भागीदारों को बताया जा सकता है। इस तरह के प्रकटीकरण अपनी क्षमता का लाभ और जोखिम पर विचार कर किया जाना चाहिए। देखभाल करने के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील जानकारी प्रकट किया जाना चाहिए, के बाद ही संभावित व्यापार भागीदारी बैंक के साथ गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहिए।


>>> बैंक पर आरोप लगाते हुए किसी भी प्रकाशन या सार्वजनिक रूप से दिए गए बयाना या अनुभव जो बैंक में किसी भी उचित अधिकार के दायरे से बाहर किए गए हैं, कि विशिष्ट लेखक विचारों का प्रतिनिधित्व करता है न कि बैंक इसे डिसक्लेमर में शामिल किया जाना चाहिए।

2 - अन्य गोपनीय सूचना -

बैंक, कई कंपनियों और व्यक्तियों के साथ कई प्रकार के व्यापार संबंध रखता है। कभी कभी, वे अपने उत्पादों या व्यापार के लिए व्यापार संबधी गोपनीय जानकारी स्वयं बैंकों को देते हैं। अन्य संदर्भों में, बैंक का अनुरोध कर सकते हैं कि किसी तीसरे पक्ष की गोपनीय जानकारी बैंक कि पार्टी के साथ एक संभावित व्यापार संबंधों का मूल्यांकन करने की अनुमति प्रदान करते हैं। इसलिए, दूसरों की गोपनीय जानकारी निर्वाह की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन के सभी सदस्यों के निदेशकों बोर्ड द्वारा लिया जाना चाहिए। इस तरह की गोपनीय जानकारी के करार के अनुसार ऐसे तृतीय पक्षों का निर्वाह किया जाना चाहिए।

  

>>> बैंक चाहता है कि हर निदेशक और शीर्ष प्रबंधन के सदस्य, महाप्रबंधकों पूरी तरह से अवैद्य लाभ से संबंधित कानूनों, विधियों, नियमों और विनियमों का पालन कडाई से करें।

>>>निदेशकों और शीर्ष प्रबंधन के सदस्य के किसी भी स्वीकृति, भुगतान वादा, या किसी भी पैसों का भुगतान करने के लिए प्राधिकृत होना, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, शेयरधारकों / हितधारकों, आदि से उपहार प्राप्त करना के रूप में इरादतन माना जाएगा। कमीशन लिना, धोखाधडी कार्य करना जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से व्यापार को प्रभावित करते हैं, को इरादतन निर्णय माना जाएगा।

IV- अच्छी निगमित प्रशासन प्रथाएँ

निदेशकों और बैंक की शीर्ष प्रबंधन बोर्ड के प्रत्येक सदस्य निम्नलिखित का पालन करने के लिए इतनी के रूप में अच्छी नैगम शासन प्रथाओं के साथ अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए करना चाहिए।

क- क्या करें

बोर्ड की बैठकों में नियमित रूप से भाग लेना और प्रभावी ढंग से विचार – विमर्श और चर्चा में भाग लेना।
बोर्ड कागजात अच्छी तरह से अध्ययन और निश्चित समय समय पर पालन रिपोर्ट के बारे में पूछताछ।
सामान्य नीतियों के मामले में सक्रिय रूप से शामिल होना
बैंक व सरकार और विभिन्न कानूनों एवं विधान द्वारा निर्धारित नीतियों से परिचित होना।
बैंक के कार्यसची कागजात, नोट्स, और मिनट की गोपनीयता सुनिश्चित करना।

ख- क्या न करें

>>>बैंक के दैनिक कामकाज में हस्तक्षेप न करें(प्रबंध निदेशक, मुख्य महाप्रबंधक और कोर प्रबंधन के लिए यह शर्त लागू नहीं होता।)
>>>किसी को बैंक के किसी घटक से संबंधित किसी भी जानकारी को प्रकट नही करें।
>>>अपने निजी विजिटिंग कार्ड / लैटर हैड पर बैंक का लोगो / विशिष्ट डिजाइन प्रदर्शित न करें। (बैंक के प्रबंध निदेशक, मुख्य महाप्रबंधक और कोर प्रबंधन को लैटर हैड या विजिटिंग कार्ड पर एसबीएम लोगो का प्रयोग करने के लिए छूट है।)

>>>किसी भी ऋण, निवेश, भवनों, या बैंक परिसर सूचीबद्धता, या ठेकेदारों की नाभिकायन, आर्किटेक्ट, लेखा परीक्षकों, डॉक्टरों, वकीलों और अन्य पेशेवरों आदि के लिए साइटों से संबंधित प्रस्ताव न करें।

>>>कुछ भी हो, अनुशासन के रखरखाव और कर्मचारियों के आचरण और एकता में हस्तक्षेप नहीं करें।

V-छूट >>>बैंक के निदेशक बोर्ड या शीर्ष प्रबंधन के सदस्य के लिए आचार संहिता के किसी भी प्रावधान से छूट लिखित रूप में बैंक के निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।

आचार कोड में शामिल मामले  बैंक, के हितधारकों और अपने व्यापार भागीदारों के लिए अत्यंत महत्व के हैं, तथा बैंक के अनुसार अपने मूल्य प्रणाली के साथ अपने व्यापार का संचालन करने की क्षमता के लिए आवश्यक हैं।

मैंने बैंक आचार संहिता को प्राप्त कर पढा है और उसका अनुपालन करने के लिए सहमत हूँ।

नाम- 

हस्ताक्षर: 

जगह और तारीख

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22.देय राशि की वसूली और प्रतिभूति का पुनर अधिग्रहण नीति

परिचय

ऋण वसूली की नीति ग्राहकों की गरिमा और सम्मान पर आधारित है। हम बकाया राशि की वसूली में अनावश्यक रूप से आक्रमक नीतियों का पालन नहीं करेंगे। हम विनम्रता, उचित उपाययोजना और अनुनय का प्रयोग करने में विश्वास करते हैं। हम बकाया राशि की वसूली और प्रतिभूति का पुनरअधिग्रहण के संबंध में निष्पक्ष प्रथाओं का पालन करते हैं, जिससे ग्राहकों का विश्वास और दीर्घकालिक संबंधों को बढ़ावा मिले।


किसी भी ऋण की चुकौती उधारकर्ता की चुकाने की क्षमता पर निर्भर होती है। हम ग्राहक को वसूली की प्रक्रिया को समझाने की कोशिश करेंगे :


(क)  ब्याज लगाने की पद्धति,

(बी)  भुगतान की प्रक्रिया और इसे कैसे ब्याज एवं मूल राशि की वसूली होती है,

(सी)  हमारे सामान्य धारणाधिकार और उसके परिणाम


हम उम्मीद करते हैं कि ग्राहक द्वारा सहमति व्यक्त चुकौती अनुसूची का वह पालन करें और ऐसा करने में बैंक उसकी सहायता करेगा और दिये गये वचन की पूर्ति करने में आने वाली समस्‍याओं का समाधान करने में बैंक मार्गदर्शन करेगा।


प्रतिभूति पुनरअधिग्रहण पर हमारी नीति चूक के मामले में बकाया राशि की वसूली करना है और ग्राहकों को सनकी ढंग से संपत्ति से वंचित करना नहीं है।  हमारा लक्ष्य प्रतिभूति के अधिग्रहण में मूल्यांकन व वसूली में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को अपनाना है। बैंक द्वारा देय राशि की वसूली और इल हेतु अनुवर्ती कार्रवाई तथा प्रतिभूतियों के पुनर अधिग्रहण में स्थानीय नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए।  उधारकर्ता के साथ चर्चा विफल होने के बाद ही प्रतिभूतियों का पुनर अधिग्रहण करना हमारा उद्देश्य है।


दिशानिर्देश

हमारे बैंक का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टाफ सदस्य और कोई भी व्यक्ति जो वसूली करने के लिए अधिकृत होंगे उन्‍हें प्रतिभूति के अधिग्रहण करते समय नीचे दिये गये दिशा निर्देशों का पालन होगा :

1.     सामान्यत: हम उसके द्वारा अपेक्षित जगह पर ग्राहक संपर्क करेंगे। निर्दिष्ट स्थान न हो तो उसके निवास स्थान पर और उनके निवास पर, व्यापार/व्यवसाय के स्थान का चुनाव करेंगे।

2.     वसूली और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए बैंक का प्रतिनिधित्व करने हेतु अधिकृत व्यक्ति की पहचान पहले उधारकर्ता को कराना चाहिए।  बकाया राशि की वसूली हेतु बैंक का प्रतिनिधित्व करने वाला अधिकृत व्‍यक्‍ति पहले स्वयं पुनर अधिग्रहण प्रतिभूतियों की अनुरोध किये जाने पर बैंक द्वारा दिये गये पत्र को दिखायेगा।

3.     हम उधारकर्ता के नीजी जीवन में दखल-अंदाज नहीं करेंगे।  आमतौर पर हम दूसरों के सामने हमारी भेंट का उद्देश्य भी नहीं बताएँगे।

4.     उधारकर्ता से सभी लिखित और मौखिक संसूचना सरल भाषा में किये जाएँगे और उनके साथ शिष्टाचार से बातचीत करेंगे।

5.     आम तौर पर, हम 7:00 बजे से 19:00 बजे के बीच ऋण वसूली का काम पूरा करेंगे।

6.     यदि कोई उधारकर्ता एक विशेष समय पर कॉल नहीं लेना चाहता और किसी विशेष जगह का अनुरोध करता है, तो हम उसका सम्मान करेंगे।

7.     हम बकाया राशि की वसूली के लिए किए गए प्रयासों और दस्तावेज़ों की प्रतियों को सुरक्षित रखेंगे।

8.     सभी देय राशि की वसूली के संबंधित सभी विवाद अथवा मतभेदों को सुलझाने के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।

9.     हम, परिवार में शोक अथवा अन्‍य अनुचित अवसरों अन्य आपत्तिजनक अवसरों में कॉल नहीं करेंगे अथवा घर पर नहीं जाएँगे।


ऋण लेने वालों को नोटिस

ऋण अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में उधारकर्ता के स्थान या निवास पर दी गयी भेंट, लिखित पत्राचार, टेलीफोन द्वारा अनुस्मारकों का उपयोग ऋण वसूली हेतु की गयी अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में समझेंगे।  इन उपायों के अलावा, संबंधित व्‍यक्‍ति को लिखित में कारण बताओ नोटिस दिए बिना, प्रतिभूति पुनरअधिग्रहण के लिए हम किसी भी अन्‍य कानूनी या अन्य वसूली के उपायों का उपयोग नहीं करेंगें।   उधारकर्ता को  बकाया राशि चुकाने के लिए न्यूनतम 15 दिन से पहले नोटिस भेजी जाएगी पावती सहित भेजी गई नोटीस को उधारकर्ता द्वारा जानबूझकर टालने पर अथवा स्वीकार न करने पर हम प्रतिभूति के पुनर अधिग्रहण के लिए हम स्वतंत्र हैं और प्रतिभूति वसूली/जब्ती  के लिए कानून के तहत आवश्यक सभी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे ।


प्रतिभूतियों का पुनरअधिग्रहण

प्रतिभूती का पुनरअधिग्रहण का उद्देश्य बकाया राशि की वसूली करना है जो की जनता की संपत्‍ति, इसका उद्देश्‍य उधारकर्ता को संपत्ती से वंचित करना नहीं है। वसूली की प्रक्रिया में प्रतिभूतियों का पुनर अधिग्रहण प्रतिभूति का मूल्यांकन और उचित साधनों के माध्यम से प्रतिभूति का पुनरअधिग्रहण करना इसमें शामिल हैं।  इन सभी में निष्पक्षता और पारदर्शिता का उपयोग किया जाना चाहिए। ऊपरोक्‍तानुसार विस्तृत रूप में नोटिस जारी करने के बाद ही जब्ती की जाएगी। संपत्‍ति का कब्‍जा लेते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। कब्‍जा लेने के बाद संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित देखभाल और हिरासत व व्यापार के सामान्य नियमों का भी पालन किया जाएगा।

मूल्यांकन और संपत्ति की बिक्री

बैंक द्वारा जब्‍त की गई संपत्ति का मूल्यांकन और बिक्री कानून के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। हम ऋण की वसूली हेतु संपत्ति की नीलामी की तारीख, समय और जगह की जानकारी देंगे जहाँ निलामी की जाएगी। हमें संपत्ति की बिक्री के बाद, यदि कोई शेष रहता है, तो राशि को पूर्ण करने के लिए उसे वसूल करने का भी हक हमें रहेगा। इतना करने के बाद भी यदि अतिरिक्त राशि रह जाती है, तो उसे उधारकर्ता को दी जाएगी, जिससे संबंधित उधारकर्ता को स्‍थिति से उभरने में सहायता मिलेगी।


प्रतिभूति वापस लेने के लिए उधारकर्ता को अवसर

हमारा उद्देश्य केवल बैंक की वसूली करने के लिए प्रतिभूति को जब्ती करना अंतिम प्रयास होता है न कि संपत्ति से उधारकर्ता को वंचित करना।  तदनुसार, हम जब्‍त करने के बाद और बिक्री लेनदेन के समापन से पहले किसी भी समय संपत्ति के अधिकार को उधारकर्ताको सौंपने पर विचार किया जा सकता है बशर्तें कि बैंक की बकाया राशि अधिकतम अवधि 90 दिनों के भीतर चुकानी होगी। अनुसूची के अनुसार,  ऋण किस्तों का भुगतान करने में ऋणी की अक्षमता की वास्‍तविकता से संतुष्टी पर, प्रतिभूति पुनरअधिग्रहण से यदि बकाया किश्त प्राप्त होने के संदर्भ में संपत्ति को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।  फिरभी भविष्य में शेष किश्तों के समय पर भुगतान होना सुनिश्चित करने के लिए उधारकर्ता द्वारा की गई व्यवस्था के प्रति आश्वस्त होने पर,; किया जाएगा।


2.हमारे बैंक के लिए केन्द्रीय सांविधिक लेखापरीक्षकों की नियुक्ति के लिए नीति एवं सितंबर 2010 से सांविधिक  केन्द्रीय लेखापरीक्षकों की सूची

वित्त मंत्रालय ,भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग,नयी दिल्ली ने अपने पत्र सं.वि.सं.1/14/2004बी ओ ए दि.21नवंबर 2008 द्वारा सूचित किया है कि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षकों की नियुक्ति के स्वायत्तता में  निम्नलिखित मार्गदर्शनों/रूपरेखा का अनुसरण करना होगा ।इसकी मुख्य विशेषतायें निम्न प्रकार हैं -


1.वर्तमान निम्न अर्हता/नामिका सूची के मानदंड यथावत  रहेंगें ।

2.सभी पी एस बी को अनिवार्य रूप से स्वायत्त का प्रयोग करते हुए सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षकों का चयन करना चाहिए ।

3.वर्तमान प्रणाली अधारित तुलन-पत्र के आकार के आधार पर प्रत्येक पी एस बी में केन्द्रीय सांविधिक लेखापरीक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

4.वर्ष 2010-11 एवं आगे के लिए , सी व ए जी(भारतीय नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) से सीधे योग्य लेखाकारों का नाम प्राप्त कर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से सांविधिक लेखा परीक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए ।

5.एक पी एस बी से एक सांविधिक लेखा परीक्षक की नियुक्ति प्रथा जारी रखनी चाहिए ।

6.भारिबैं/सी व ए जी द्वारा प्रदत्त सूची से पी एस बी द्वारा योग्य  सांविधिक केन्द्रीय लेखा परीक्षक का चयन किया जाएगा और सांविधिक लेखा परीक्षक की नियुक्ति पर विचार करने हेतु  लेखापरीक्षक फर्म से लिखित सम्मति के बाद  करेंगें तथा  वास्तविक नियुक्ति से पूर्व तत्संबंधी ए सी बी/निदेशक मंडल का अनुमोदन प्राप्त कर भारतीय रिजर्व बैंक को सिफारिश भेजेंगें।

7.बैंकों को नियुक्ति के लिए से चयित लेखापरीक्षक को स्पष्ट रूप से सूचित करना चाहिए कि एक लेखापरीक्षक फर्म को केवल एक पी एस बी में लेखा समनुदेशन लिया जाना चाहिए एवं भा रि बै को सिफारिश भेजने से पहले,तत्संबंधी बैंक में सांविधिक लेखापरीक्षक की नियुक्ति के विषय में उनकी सम्मति लिखित रूप से ली जानी चाहिए ।लेखापरीक्षक द्वारा

दी गयी सम्मति को अपरिवर्तनीय माना जाएगा ।

8.सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक के लगातार 3 वर्षों के वर्तमान कार्यकाल के बाद उन्हें 2 वर्षों के लिए अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए ।

सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक की नियुक्ति के लिए जारी उपरोक्त दिशानिर्देश के आधार पर हमारे बैंक में निम्नलिखित नीति को लागू करने का प्रस्ताव है-

1.नयी प्रक्रिया के अनुसार,भा रि बै से पूर्वानुमोदन प्राप्त करने के बाद,अनुषंगी बैंकों की सिफारिशों के आधार पर भारतीय स्टेट बैंक सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षकों की नियुक्ति करेगा ।

2.पिछले वर्ष के अंत पर तुलन पत्र के आकार(आस्ति एवं देयताओं को साथ लेकर) के आधार पर, जिनके तुलनपत्र का आकार रू 50000 करोड से रू. 1 लाख करोड तक है, बैंक पाँच सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक , रख सकता है ।तदनुसार वर्ष 2010-11 के लिए बैंक पाँच सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक रख सकता है ।

3. सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक  के संदर्भ में हमारे पास उपयुक्त लेखापरीक्षक फर्म होंगें जो भा रि बैं द्वारा नियत योग्य अर्हता रखते हैं । ऎसे लेखापरीक्षक फर्म जिनके पास पर्याप्त अनुभव,वाणिज्यिक बैंकों को लेखा प्रकटीकरण, तकनीकि अनुभवयुक्त साझेदार रखते हो,ऎसे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी ।

4.कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 226 के प्रावधानों के अंतर्गत केवल योग्य लेखापरीक्षक जिनके विषय में आई सी ए आई के रिकार्ड के अनुसार कोई प्रतिकूल टिप्पणी/लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई /नहीं की गयी हो,उन्हें लेखापरीक्षक की नियुक्ति के लिए योग्य माना जाएगा ।

5.ॠणग्रस्तता के संदर्भ में कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 226(3) डी की अपेक्षाओं में नियुक्ति के लिए चयित लेखापरीक्षक फर्म को सत्यापित करना होगा कि फर्म या कंपनी के भागीदार के पति/पत्नी, आश्रित बच्चे,भाई,बहन कोई भी बैंक से किसी प्रकार की ऋणग्रस्तता में नहीं है ।

6.भा रि बैं द्वारा प्रस्तावित फार्मेट के अनुसार यह घोषणा प्राप्त करनी होगी कि फर्म या कंपनी के भागीदार के पति/पत्नी, आश्रित बच्चे,भाई,बहन कोई भी किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान के इरादतन चूककर्ता नहीं घोषित किये गये हो । अगर कोई लेखापरीक्षक/फर्म ऎसी घोषणा करने से इंकार करता है तो सांविधिक लेखा समनुदेशन उन्हें नहीं दिया जाएगा ।

7. लेखापरीक्षक/ लेखा फर्म के स्वातंत्र्य की सुरक्षा के लिए भा रि बैं की पूर्वानुमति के बिना हम किसी लेखापरीक्षक फर्म को हटा नहीं सकते हैं ।

8.यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अनुमोदित लेखापरीक्षक/लेखा फर्म को उपयुक्त लेखा समनुदेशन आबंटित किये जाऎंगें एवं शाखाओं के आबंटन मॆं  क्रमिक लेखापरीक्षक व नये लेखापरीक्षको के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा ।

9. मुख्य महा प्रबंधक,महा प्रबंधक (ट्रेजरी) तथा महा प्रबंधक(तकनीकि/सी आर ओ) की समिति को सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षक के नाम की सिफारिश करने का अधिकार है।

10.बैंक के लिए लेखापरीक्षक के रूप में नियुक्त न होने पर यदि कोई शिकायत हो तो मामला प्रबंधक निदेशक को भेजा जाएगा और उनका निर्णय बैंक/लेखापरीक्षक दोनों को मान्य होगा ।

11. सांविधिक केन्द्रीय लेखापरीक्षकों की सूची भारतीय स्टेट बैंक को उनके अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा । भारतीय स्टेट बैंक के अनुमोदन के पश्चात अंतिम लेखापरीक्षको की सूची को लेखापरीक्षक मंडल के सामने सूचना हेतु प्रस्तुत किया जाएगा । लेखापरीक्षकों की अनुमोदित सूची बैंक के बेवसाईट पर प्रदर्शित की जाएगी ।

 हमारे बैंक के सांविधिक लेखापरीक्षक की सूची

*मेसर्स रामराज व कंपनी,बेंगलूर

* मेसर्स गोपाल अय्यर व सुब्रमणियन,कोयम्बत्तुर

* मेसर्स ग्रोवर लल्ला व मेहता,नयी दिल्ली

*भसीन राघवन व कंपनी,नयी दिल्ली

*के पी राव व कंपनी,बेंगलूर

 वित्तीय वर्ष 2011-2012 के लिए सांविधिक केंद्रीय लेखापरीक्षक

क्रम सं.

सांविधिक केंद्रीय लेखापरीक्षक का नाम

1

मेसर्स भसीन राघवन व कंपनी,ई- 48,भगत सिंह मार्केट,गोल मार्कॆट के नजदीक,नयी दिल्ली-110001

2

मेसर्स के पी राव व कंपनी,पूर्णिमा, स्टेट बैंक रोड,बेंगलूर-560001

3

मेसर्स बी एल अजमेरा व कं.मलजी छोगालाल ट्र्स्ट बिंल्डिंग,एम आई रोड,जयपुर- 302001

4

मेसर्स एम के पी एस व सहयोगी,ब्लाक बी, एल बी एस कालोनी,मोनालिका अपार्टमेंट,पुराना स्टेशन रोड,भुवनेश्वर-751006

5

मेसर्स एस के बसु व कंपनी,द्वितीय तल,टेम्पल चैम्बर्स,6,ओल्ड पोस्ट आफिस रोड,कोलकाता- 700001

6

मेसर्स एन आर सुरेश व कंपनी,9,II लेन,11वाँ मेन रोड,ट्र्स्टपुरम, चेन्नै-600024

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25.ग्राहक शिकायत निवारण नीति

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की ग्राहक शिकायत निवारण नीति निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:


'.‘बैंक के उत्पाद, सेवाऐं और लोगों की सहायता के लिए और ग्राहकोन्मुखी है।  बैंक के व्यापार का विस्तार  पूरी तरह से  अपनी सेवाओं के जरियें ग्राहकों की संतुष्टि  पर निर्भर करता है। ग्राहकों की शिकायतों को प्राप्त करने और उन्‍हें दूर करने के लिए एक  उपयुक्त प्रणाली की आवश्यकता है ।बैंक द्वारा की गई किसी भी गलती को शिष्टता, तत्‍काल प्रभाव से और संतोषजनक ढंग से सुधार कर तुरंत दूर किया जाना  चाहिए।   शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी सार्वजनिकों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।.


उपरोक्त सिद्धांत को बैंक की शिकायत निवारण नीति में शामिल किया गया है।


2. 2. शाखा लेनदेन से संबंधित शिकायत:

  1. यदिं लेनदेन के मामले में कोई कठिनाई हो तो, ग्राहक संबंधित अधिकारी या विभाग के प्रबंधक, शाखा प्रबंधक से संपर्क कर सकते हैं वे यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राहकों की बैंकिंग आवश्‍यकतायें पूरी हो रही है अथवा नहीं। यद्यपिं,  ऐसा न होने पर है, ग्राहक  शिकायत पुस्तक की मांग कर सकता है, जो सभी शाखाओं में उपलब्ध होती है और अपनी लिखित शिकायत दर्ज करा सकते  हैं। शिकायत की एक प्रति, प्राप्ति रसीद के साथ  ग्राहक को लौटा दी जाएगी।  शाखा सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि, शिकायत का निवारण यथाशीघ्र किया जाए और अधिकतम तीन सप्ताह अवधि के भीतर किया जाए।   कुछ कारणों से तीन सप्‍ताह के भीतर शिकायत का निवारण करने में असमर्थ है तो  ग्राहक को उसके कारणों के बारे में बताया जाएगा और समस्‍या के निवारण के लिए जल्दी कार्रवाई की जाएगी।
  2. यदिं ग्राहक शाखा में आने में असमर्थ है,  तो वह अपनी शिकायत 'UNHAPPY' SMS  टाईप कर 9900020002 इस नंबर पर मैसेज भेज कर शिकायत दर्ज करा सकता है । शिकायतकर्ता को एक शिकायत संख्या दी जाएगी जिसका प्रयोग कर वह अपनी शिकायत की स्थिति जानने के लिए कर सकता है।   इस चैनल पर दर्ज करायी गई शिकायत को   वेब आधारित प्रणाली के माध्यम से शाखा को निवारण हेतु भेज दिया जाएगा।
  3. शाखा में कोई समस्‍या आती है, अथवा शाखा/एसएमएस चैनल से शिकायत के संबंध में असंतोषजनक उत्तर प्राप्‍त होता है,   तो ग्राहक शाखा जिस क्षेत्र/अंचल के नियंत्रण में शाखा के कार्य आता है, उस क्षेत्र/अंचल के सहायक महा प्रबंधक/उप महा प्रबंधक से संपर्क कर सकते हैं   अधिकारियों के संपर्क का ब्यौरा शाखा या हेल्पलाइन से प्राप्त किया जा सकता है।  हेल्पलाइन नंबर बैंक की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है।
  4. जिस अंचल कार्यालय के अंतर्गत शाखा आती है उस अंचल को ग्राहक पत्र लिख सकते हैं।  आंचलिक कार्यालय के नोडल अधिकारी का पता और संपर्क विवरण शाखाओं द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।    ग्राहक इसे बैंक की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं।
  5. ग्राहकों को अपनी शिकायतों को दर्ज कराने के लिए बैंक की सार्वजनिक वेबसाइट पर  शिकायत पत्र भी उपलब्ध कराया गया है।  पूरी तरह से विवरण भरकर आवेदन भेजने के बाद ग्राहक को एक युनिक टिकट नंबर दिया जाएगा, जिसके माध्‍यम से वह अपनी शिकायत संबंधी जानकारी शाखा/आंचलिक कार्यालय अथवा प्रधान कार्यालय से प्राप्‍त कर सकता है
  6. शाखा को फोन पर भी शिकायत की जा सकती है और ग्राहक को एक संदर्भ संख्या प्रदान की  जाएगी जिससे वह शाखा को की गई शिकायत पर की गई  अनुवर्ती कार्रवाई की जानकारी प्राप्‍त कर सकता है।


3. ग्राहकों की शिकायतों  का निर्धारित  ढांचा


अधिकतम तीन सप्ताह भीतर  शिकायत का निवारण हो्ना चाहिए,   संगठन में विभिन्न स्तरों पर शिकायतों के निवारण के लिए ढांचा निर्धारित किया गया है।

निर्धारित अवधि में शिकायतों को दूर नहीं किया गया तो इससे ग्राहकों में उच्च अधिकारियों के प्रति असंतुष्टि का भाव निर्माण होता है।.ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने के लिए निम्‍नानुसार समय दिया जाता है:

 
 




क्रमांक संख्‍या


शिकायत का दर्ज करना/वृद्धि/ शिकायतों में स्‍वयं एसक्लेशन

शिकायत दर्ज करने के दिन/एसक्लेशन


शिकायत निवारण के लिए उपलब्ध दिन (अधिकतम समय तीन सप्ताह के भीतर)

1

शाखा

दिन 1

10 दिन

2

आंचलिक कार्यालय

11 दिन

5 दिन

3

प्रधान कार्यालय

16 दिन

6 दिन

               

.ग्राहक द्वारा दर्ज कराई शिकायत को निवारण के लिए पहले शाखा के पास भेजा जाता है। यदिं शाखा द्वारा शिकायत के प्राप्‍ति 10 दिनों के भीतर निराकरण नहीं हुआ अथवा ग्राहक किये गये निवारण से संतुष्‍ट नहीं है तो  शिकायत के दर्ज कराने के  15 days 11 वें दिन आंचलिक कार्यालय को अपनी शिकायत अग्रेषित कर सकता है। यदिं शिकायत के अगले 5 दिनों के अंदर (पहले दिन से 15 दिनों तकfrom day 1) निराकरण नहीं किया जाता है, तो ग्राहक आगे प्रधान कार्यालय  को निवारण हेतु शिकायत को अग्रेषित कर सकता है। शिकायत का निराकरण सदैव 21 दिन/तीन सप्ताह की अधिकतम अवधि के भीतर करना होगा।


4.4. प्रौद्योगिकी  लेनदेन से संबंधित शिकायत

  1. ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए और वैकल्पिक चैनलों (एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग) की जानकारी के अभाव के कारण बैंक ने  इन चैनलों के उपयोग से उत्पन्न होने वाली शिकायतों के निवारण के लिए अनन्य व्‍यवस्‍था शुरू की है वर्तमान में, एटीएम सह डेबिट कार्ड से संबंधित कार्यों में सहायता के लिए एक विशेष टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर1800-112-211 अथवा 1800-425-3800 और 080-26599990 उपलब्ध कराया गया है। Thecustomer may also lodge his complaint on SMS Unhappy number 99- 0002-0002 or ग्राहक 99-0002-0002 इस नंबर पर SMS Unhappy इस प्रकार का संदेश भेज कर अथवा अपनी होम ब्रांच से संपर्क कर  अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।contact their home branch. यदिं ग्राहक उसकी शिकायत के निपटन से संतुष्ट नहीं है तो वह प्रधान कार्यालय के महा प्रबंधक (परिचालन) से शिकायत से संपर्क कर सकते हैं।
  2. इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन में सहायता के लिए,ग्राहक हेल्पलाइन नंबर 1800-425-2244 से संपर्क कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की शिकायत के मामले में वह शाखा से संपर्क कर सकता है अथवा उपरोक्‍त पैरा 2.ii. में दिये गये संपर्कविवरण अथवा शाखा से संपर्क कर सकता है। वह अपनी शिकायत बैंक की इंटरनेट बैंकिंग वेब साइट पर (www.onlinesbm.com) पर भी दर्ज करा सकता है।A ticket number will be ऑनलाइन शिकायत दर्ज करते ही उन्‍हें तुरंत on the Bank's internet banking web site (www.onlinesbm.com). एक टिकट नंबर प्राप्‍त हो जाएगा। ग्राहक अपनी युनिक पहचान संख्‍या का प्रयोग कर शिकायत की स्‍थिति की जानकारी प्राप्‍त कर सकता है।  ग्राहक अपनी शिकायतों को समाधान हेतु This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर ई-मेल भेज सकते हैं।
  3. मोबाइल बैंकिंग लेनदेन में सहायता के लिए ग्राहकों की हेल्पलाइन नंबर 1800-425-2244  पर संपर्क कर सकते हैं। यदिं किसी शिकायत के मामले में वह शाखा से संपर्क कर सकता है अथवा पैरा 2.ii. में उल्लेख किये अनुसार SMS Unhappy नंबर का  1800-425-2244.भी उपयोग कर सकता है। . वह अपनी शिकायत बैंक की वेब साइट (www.statebankofmysore.co.inwww.statebankofmysore.co.in).) पर भी ऑनलाइन अपनी भेज सकते हैं।


5. 5. ग्राहकों की शिकायतों से निपटने के लिए नोडल अधिकारी:

  1. प्रधान कार्यालय में ग्राहको की शिकायतों से निपटने के  लिए  महा प्रबंधक (परिचालन) नोडल अधिकारी होंगे। नोडल अधिकारी संपूर्ण बैंक में शिकायत निवारण के कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार होंगें।व्‍यथित ग्राहक अपनी शिकायत के संबंध में सीधे नोडल अधिकारी को लिख सकते हैं।   उनके संपर्क विवरण .बैंक की वेब साइट पर भी उपलब्ध हैं।
  2. आंचलिक कार्यालयों में शिकायतों के निपटन के लिए नोडल अधिकारी संबंधित आंचलिक प्रबंधक होंगे और शिकायतों को संबंधित उप महा प्रबंधक के अंतर्गत मुख्य प्रबंधक (प्रशासन) दूर करेंगे।  नोडल अधिकारी उनके नियंत्रणाधीन शाखाओं में बैंक की शिकायत निवारण प्रणाली का कार्यान्वयन करेंगे।  यदि कोई कमी पायी जाती है तो वह महा प्रबंधक (प्रचालन), प्रधान कार्यालय को इसमें सुधार करने के लिए कहेंगे।   आंचलिक केंद्रीय अधिकारी नीतियों का कार्यान्वयन भी सुनिश्चित करेगे और बीसीएसबीआई द्वारा जारी ग्राहक के प्रति बैंक कोड की प्रतिबद्धताओं और भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य नियामक अभिकरणों द्वारा ग्राहक सेवा पर जारी ​​निर्देश को भी सुनिश्‍चित करेंगे।


6. 6. शिकायत और निवारण की पावती:

  1. शाखा, अंचल अथवा प्रधान कार्यालय यदिं कोई मामला आने पर शिकायत प्राप्‍ति के पांच दिनों के भीतर ही शिकायत प्राप्‍ति की पावती देंगे और शिकायत के तीन सप्ताह की अधिकतम अवधि के भीतर का समाधान करने की पहल करेंगे। ग्राहक को भी की गई कार्रवाई से की सूचित किया जाएगा, यदिं निवारण में किसी भी प्रकार का विलंब होता है  और शिकायत निवारण में हो रही प्रगति से ग्राहक को अवगत कराया जाएगा।
  2. जहां तक संभव हो  ई-मेल द्वारा प्राप्त शिकायतों की पावती ईमेल द्वारा ही भेजी जाएगी। ऐसे मामलों में की गई अनुवर्ती कार्रवाई की जानकारी ग्राहकों को ईमेल द्वारा परामर्श दिया जाएगा। यद्यपिं    गंभीर स्‍वरूप की शिकायतों और निवारण में हो रही देरी के बारे में लिखित में जानकारी भेजी जाएगी।
  3. iii) यदि ग्राहक बैंक द्वारा प्रदान की गई निवारण प्रणाली से नाखुश है और उसकी शिकायत का शिकायत करने की तिथि से एक माह के भीतर निराकरण नहीं किया गया है तो, वह शिकायत निवारण के लिए राज्य की राजधानियों में स्थित बैंकिंग लोकपाल से भी संपर्क कर सकता है। इस संबंध में ग्राहक को  शाखाओं/आंचलिक कार्यालयों/नोडल अधिकारियों   द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन किया जाएगा। बैंकिंग लोकपाल का संपर्क विवरण संबंधित क्षेत्र की प्रत्येक शाखा/बैंक की वेब साइट पर प्रदर्शित किया गया हैं।

 7. 7. समीक्षा तंत्र

 i. i.प्रबंध निदेशक

ग्राहक की शिकायतों के निवारण के मुख्य तीन स्तर है - शाखा, आंचलिक  कार्यालय और प्रधान कार्यालय। ग्राहकों द्वारा की गई अधिकतर शिकायतें सीधे प्रबंध निदेशक को की जा  रही हैं।उठाए गए शिकायत के मुद्दों गंभीर स्‍वरूप के हो तो    प्रबंध निदेशक शिकायत के कारण, शिकायत निवारण और आगे कार्रवाई की गई की रिपोर्ट मंगवायेंगे। इस तरह की शिकायतों का निपटान केवल प्रबंध निदेशक द्वारा अनुमोदन प्राप्‍त होने पर ही किया जाएगा

 बैंक बोर्ड

ग्राहकों द्वारा प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण और शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा को

बैंक के निदेशकों के बोर्ड के समक्ष हर तिमाही में पेश किया जाएगा।


  1. बोर्ड की ग्राहक सेवा समिति

बोर्ड की ग्राहक सेवा समिति ग्राहकों की शिकायतों के प्रमुख क्षेत्रों और ग्राहक सेवा में सुधार के लिए किए गए उपायों की तिमाही में समीक्षा करेगी। समिति प्रत्‍येक जमाकर्ता और उधारकर्ता को प्रदान की गई सेवा की गुणवत्ता  और उसके प्रभाव जांच करेंगी।समिति ग्राहक सेवा की ​​स्थायी समिति के कामकाज की भी समीक्षा करेंगी।

 iv.ग्राहक सेवा पर ​​स्थायी समिति

ग्राहक सेवा की ​​स्थायी समिति का गठन प्रधान कार्यालय में मुख्य महा प्रबंधक की अध्यक्षता में किया जाएगा। समिति के अन्य सदस्य प्रधान कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्य महा प्रबंधक द्वारा मनोनीत अन्‍य अधिकारी होंगे।समिति बैंक के ग्राहकों का भी केंद्रीय प्रतिनिधित्व करेगी ,दो से अधिक नहीं, जिनमें एक . वरिष्ठ नागरिक/पेंशनभोगी होगा)। समिति अंचल में शाखाओं से प्राप्‍त ग्राहक सेवा की समीक्षा करेंगी और ग्राहक सेवा और निवारण ग्राहक शिकायतों को दूर करने के लिए   सूक्ष्म और लघु उद्यम को किये गये वायदों को पूरा करने और बीसीएसबीआई के कोड में की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए उपाय सुझाऐगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा   स्‍थायी समिति के अन्य कार्यों को निर्देशित किया जाएगा।


8.ग्राहकों की पूर्व निर्धारित घटनाओं की शिकायतों और उनका निपटान करने में परिचालन कर्मचारियों की संवेदनशीलताअ

ग्राहकों शिकायत शाखाओं द्वारा दी गई सेवा की गुणवत्ता पर अपनी बहुमूल्य प्रतिपुष्‍टी देते हैं और बैंक द्वारा तकनीकि में उठाए गए कदमों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनायी गई पू्र्व-अभियांत्रिकी प्रक्रिया का व्यवसाय विकास पर और बेहतर ग्राहकसंतोष पर क्‍या प्रभाव पड़ रहा है यह पता लगता है।   बैंक उत्सुकता, सहानुभूति और मुस्तैदी के साथ किये गये ग्राहकों के लेनदेनों/अनुरोधों का निपटान करने वाले संवेदनशील स्टाफ के महत्व को समझता है। इस संबंध में  सभी शाखायें   अधिकारियों, पंचाट कर्मचारी और अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ . ग्राहकों द्वारा एक ग्राहक सेवा समिति का गठन करेगी। समिति शाखा में   ग्राहक सेवा में वृद्धि करने के लिए संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा करने और सुधार के लिए समिति द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई  करने के लिए प्रत्‍येक माह में एक बैठक का आयोजन करेगी।  सभी शाखाओं में हर तिमाही  में कम से कम एक बार कार्यक्रम का आयोजन करेंगे जिसमें स्टाफ और ग्राहकों स्वतंत्र रूप से .सेवा संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। जब ऐसी बैठकों का आयोजन किया जाएगा तब   वह ग्राहकों को भी प्रशासनिक कार्यालयों के शाखा प्रबंधक/अन्य अधिकारियों से उनकी शिकायतों के बारे में चर्चा करने स्‍वतंत्रता होगी।  प्रत्‍येक महीने की 15 तारीख को  ग्राहक दिवस मनाया जा जाएगा (यदिं 15 को अवकाश/रविवार हो, तो उसके बाद आने वाली दिवस पर प्रशासनिक कार्यालयों में शीर्ष पदाधिकारियों  (3.00 और शाखा प्रबंधकों को ग्राहक को अपनी शिकायतें करने के लिए और उनके सुझावों को सुनने के प्रत्‍येक माह की 15 तारीख को (यदिं 15 को अवकाश/रविवार हो, तो उसके बाद आने वाली दिवस पर न्यूनतम दो घंटे लिए (दोपहर 3.00PM to 5.00PM) on the 15 से शाम 5:00 बजे तक) स्‍वयं उपलब्ध रहना होगा  बैंक को ग्राहक सेवा और ग्राहको की शिकायतों को कमी लाने के लिए    ​कर्मचारियों हेतु नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए।    इसके अलावा, सभी कर्मचारियों के लिए 3 दिन से अधिक का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए, जिसमें   कर्मचारियों को क्रुद्ध ग्राहकों से निपटने के लिए संवेदनशील और आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए एक सत्र का आयोजन करना चाहिए। स्टेट बैंक ऑफ  मैसूर के ग्राहकों की धारणा को समझने के लिए और ग्राहक संतुष्टि में सुधार के लिए, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए  भी ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण का आयोजन करेगा।

शाखाओं को प्रत्‍येक महीने के  15 तारीख को मनाये जा रहे ग्राहक दिवस के अनुपालन सुनिश्चित करने और उसके परिणामो को दर्ज करने की सलाह दी जाती है (यदिं 15 को अवकाश/रविवार हो, तो उसके बाद आने वाली दिवस पर।)

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26.पर्दाफाश करनेवाली (विसल ब्‍लोअर) नीति

उद्देश्य:

'पर्दाफाश करनेवाली (विसल ब्‍लोअर) नीति' का उद्देश्य – बैंकों में उच्च नैतिक मूल्‍यों की स्‍थापना, कामकाज के दौरान नैतिक और व्यापारिक  मानकों पालन सुनिश्‍चित करना और कॉर्पोरेट शासन की एक स्थायी और मजबूत संस्कृति का निर्माण करना है।  नीति के शर्तों में, यह एक ऐसी आंतरिक व्यवस्था है, जिसमें  स्टाफ के सदस्यों को अनैतिक आचरण के बारे में जानकारी देने, बैंक कोड के  वास्तविक अथवा संदिग्ध धोखाधड़ी तथा आचरण नीति के उल्लंघन करने के मामले की प्रबंधन को सूचित किया जा सकें। इस नीति का उद्देश्य कर्मचारियों की  संदिग्ध या वास्तविक घटनाओं , अवैध, अनैतिक या अनुचित कार्यों, प्रथाओं या व्यवहार कोबिना किसी डर के प्रतिकार करना और उनके बारे में रिपोर्ट करना तथा बैंक के सभी कर्मचारियों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।   इस नीति के माध्यम से कर्मचारियों अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और अन्य दुराचार के विरूद्ध आवाज उठा सकते है।  यह बैंक में पाये जाने वाले अनैतिक आचरण/ व्यवहार का खुलासा करने वाले कर्मचारियों को संरक्षण आवश्यक रक्षोपाय प्रदान करता है।

इस नीति को मौजूदा बैंक के निर्देश के साथ ही साथ इस मामले में भारत सरकार/ केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के संयोजन के रूप में पढ़ा जा सकता है।


परिभाषाएं विसल ब्लोअर नीति

इस नीति में उपयोग में लायी जाने वाली संकल्‍पनाओं की कुछ की परिभाषा इस प्रकार हैं:

विसल ब्लोअर नीति इस नीति के तहत  बैंक के कर्मचारी ही प्रकटीकरण  के माध्‍यम बने रहे है। 'पर्दाफाश करनेवाली   party.विसल ब्लोअर की भूमिका केवल एक जानकारी देने वाले की होगी। पर्दाफाश करने वाले  न तो जांचकर्ता होंगे, न ही तथ्यों की छानबीन करने वाले और न ही वे उपयुक्त सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्रवाई निर्धारित करने वाले हो सकते हैं।


.नामित अधिकारी - प्रधान कार्यालय में सहायक महा प्रबंधक (सतर्कता) होगे।

सतर्कता विभाग, प्रधान कार्यालय बैंक में नामित अधिकारी का नाम, टेलीफोन नंबर, ई मेल पता परिचालित करने की व्यवस्था करेगा, ताकि कर्मचारी विसल ब्लोअर योजना के तहत अपनी शिकायतों को  रजिस्टर कर सकें।


विषय-शाखा/कर्मचारी - विशेष शाखा और/अथवा कर्मचारी .जिसके संबंध में प्रकटीकरण किया जा रहा है।

कर्मचारी - बैंक के सभी कर्मचारी, Employees– अधिकारी और पंचाट कर्मचारियों सहित, .बैंक में संविदा सेवा के तहत काम करने वाले सभी का भी इसमें समावेश है।


प्रकटीकरण कोई भी संपर्क साधन, चाहे वह पत्र द्वारा/ईमेल द्वारा/या टेलीफोन  द्वारा अथवा विसल ब्लोअर से संबंधित सद्भाव से किए गए आचरण अथवा अनैतिक व्यवहार या सेवा नियमों का उल्लंघन।


समीक्षा प्राधिकारी - प्रधान कार्यालय में मुख्य सतर्कता अधिकारी


उचित विभागीय कार्रवाई - कर्मचारियों/अधिकारियों के सेवा नियमों के अनुसार लागू होने वाली विभागीय कार्रवाई


जांचकर्ता - अर्थात इस नीति के तहत जांच का संचालन करने के लिए नामित प्राधिकरण द्वारा विधिवत रूप से नियुक्त/सुझाया गया कोई भी व्यक्ति (अनेक व्‍यक्‍ति)


कार्यक्षेत्र /व्‍याप्ति - बैंक के सभी कर्मचारियों का इस नीति के अंतर्गत समावेश होता हैं।  नीति के अंतर्गत  बैंक में हुए संदिग्ध   कदाचार/घटनाओं का समावेश होता है इसके साथ-साथ:

••         भ्रष्टाचार

••         धोखाधड़ी

••         ,आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करना,

••         जानकारी/दस्तावेजों में हेरफेर करना,

• •        कर्मचारी का कोई भी ऐसा कार्य, जिसका प्रतिकूल प्रभाव बैंक के हित को प्रभावित करता हो और बैंक की वित्तीय क्षमता अथवा प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाने वाले अन्‍य किसी भी कारणों का इसमें समावेश होता है।


शिकायत में दिया गया विवरण सटीक और सत्‍यापण करने योग्‍य होना चाहिए।


अपवाद

बैंक के नीतिगत निर्णय इस नीति के दायरे से बाहर होंगे।


रिपोर्टिंग प्रणाली

कोई भी कर्मचारी(अधिकारी/पंचाट) निम्नलिखितानुसार जानकारी का खुलासा कर सकता है।

i.

  1. निर्धारित फार्मेट (अनुबंध-I) पर लिखित रूप में, नामित अधिकारी को     सील बंद लिफाफे में, जिस पर विशेष रूप से, बड़े अक्षरों में ”. "विसल ब्लोअर स्कीम के तहत खोले" ऐसा लिखा गया हो।
  2. शिकायत के लिफाफे को  नामित अधिकारी जैसे सहायक महा प्रबंधक (सतर्कता), प्रधान कार्यालय को भेजा जाना चाहिए।  प्रकटीकरण युक्त लिफाफा के शीर्ष पर खुलासा करने वाले की पहचान को जाहिर न करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
  3. यदि  उसकी पहचान/संपर्क नंबर/पते के उपयुक्त प्रमाण तो यह है कि अतिरिक्त कोई हो जानकारी हो तो उसे प्राप्त किया जा सकता है।   यदिं पहचान सुनिश्चित नहीं की जा सकता है, तो ऐसे मामले बेनामी/छद्म शिकायत मान कर उस पर . आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  4. शिकायतों  को कर्मचारी की कार्यालयीन ई-मेल आईडी से विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई नामित ई-मेल आईडी पर भी भेजा जा सकता है।  हालांकि, विसल ब्लोअर का संपर्क विवरण/पता.  उपलब्‍ध कराया जाना चाहिए। उपरोक्‍त  के अभाव/अस्‍पष्‍टता के मामले में  उस शिकायत को बेनामी/छद्म नाम से की गई शिकायत माना जा सकता है और ऐसी शिकायतों पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  5. समर्पित टेलीफोन नंबर पर भी खुलासा किया  जा सकता है। हालांकि, विसल  ब्लोअर को उसकी पहचान का खुलासा करना होगा और नामित अधिकारी द्वारा उसकी पहचान की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।  यदिं आवश्‍यक हो तो, संपर्क किये गये नामित अधिकारी द्वारा अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जा सकती है।
  6. खुलासा चाहे वह   पत्र/ईमेल/टेलीफोन जैसे किसी भी माध्‍यम से हो "विषय-शाखा/कर्मचारी" के बारे में विशिष्ट और सत्‍यापनयोग्‍य जानकारी दी जानी चाहिए।


विसल ब्‍लोअर का गोपनीय तंत्र:

  1. निर्धारित प्रारूप (अनुबंध-I) में प्राप्त शिकायतों  को ही विसल ब्लोअर के तहत खोला जाएगा।
  2. शिकायत प्राप्त होने पर, नामित प्राधिकारी रजिस्टर (अनुबंध-II ए) में शिकायत का विवरण की प्रविष्‍ठी करेंगे  और शिकायत के सभी पृष्ठों पर कोड नंबर आबंटित करेंगे। शिकायत।  नामित प्राधिकारी की हिरासत में विसल ब्लोअर के ठिकाने से युक्त के लिफाफे का पहले पृष्‍ठ नामित प्राधिकारी की हिरासत में रखा जाएगा। विसल ब्लोअर की जानकारी से युक्त पृष्ठों को संबंधित डेस्क अधिकारी को जांच के प्रयोजन के लिए के सौंप दिया जाएगा। नामित अधिकारी विसल ब्लोअर की पहचान का खुलासा न हो यह सुनिश्चित करेगा। अनुबंध-II के अनुसार रजिस्टर  गोपनीय होगा और उसे केवल नामित अधिकारी के पास ही रखा जाएगा।iii.
  3. शिकायत का विवरण निर्धारित रजिस्टर (अनुबंध-IIबी)  में दर्ज किया जाएगा ।
  4. शिकायतकर्ता को शिकायत के साथ अपनी पहचान का प्रमाण भेजना चाहिए।


विसल ब्लोअर की सुरक्षा

बैंक शिकायतकर्ताओं की और उनके नाम के गोपनीयता की रक्षा करेगा और पहचान के रूप में कानून के तहत आवश्यकता को छोड़कर कभी भी खुलासा नहीं किया जाएगा।

  1. कर्मचारी के विरूद्ध  किसी भी प्रतिकूल दंडात्मक कार्रवाई अथवा उसकी सिफारिश की गई किसी भी अनैतिक और अनुचित प्रथाओं का   उसका खुलासा नहीं किया जाएगा। विसल ब्लोअर प्रकटीकरण करने के लिए आरोपी हैं या नहीं है  यह सुनिश्चित किया जाएगा।
  2. ऐसे मामलों में तंग किये जाने वाले मामले में ऐसे व्यक्तियों पर गंभीर रुख अपनाते हुए विसल ब्लोअर को तंग करने के अपराध में विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
  3. विसल ब्लोअर की पहचान को जांच करने के वाले आधिकारियों के सामने खुलासा नहीं किया जाएगा ।
  4. किसी भी व्यक्ति को इस आधार पर कि वह तंग किया जा रहा है अथवा किसी भी कार्रवाई से व्यथित है, तो  कारण वह समीक्षा प्राधिकरण (बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी) के समक्ष शिकायत या प्रकटीकरण दायर कर सकता है, जिसमें मुख्य सतर्कता अधिकारी संबंधित व्यक्ति को   अथवा प्राधिकरण को इस मामले में उपयुक्त निर्देश दे सकते हैं।

विसल ब्लोअर के हितों की रक्षा करने के लिए उसके  वार्षिक मूल्यांकन/निष्‍पादन रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल प्रविष्‍टि न हो इसलिए उसका/उसकी वार्षिक रिपोर्ट की   संबंधित 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के बंद होने के बाद तीन (03) महीने के भीतर उसका/उसकी वार्षिक मूल्‍यांकण रिपोर्ट की प्राधिकरण के उसके उच्च अधिकारी द्वारा  समीक्षा के लिए अनुरोध करने का विकल्प दिया जा सकता है।


सुरक्षा से निरर्हताएं

  1. योजना के अंतर्गत सुरक्षा का अर्थ यह नहीं होगा कि, सुरक्षा से    विभागीय कार्रवाई के साथ किए गए झूठे या फर्जी प्रकटीकरण से उत्पन्न  असद्भभावपूर्णता से किये गये अथवा व्यक्तिगत शिकायत के कारण की गई शिकायतो के कारण जारी विभागीय कर्रवाई से बचाना नहीं  है।
  2. विसल ब्लोअर्स,  जिसने कोई खुलासा किया हो, जो   बाद में दुर्भावनापूर्ण अथवा तुच्छ अथवा दुर्भावनापूर्ण पाया जाता है तो    दोषी व्‍यक्‍ति के विरूद्ध मुकदमा चलाया जाएगा सेवा नियम/द्विपक्षीय निपटान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई  की जाएगी।


  1. यह नीति किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से एक कर्मचारी की रक्षा नहीं करता, जो  इस नीति के तहत या कथित गलत तरीके के आचरण, बूरे काम के लिए, अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण से होती है।


ऐसी खुलासे पर की जाने वाली कार्रवाई/ रिपोर्टिंग प्रणाली

  1. नामित अधिकारी शिकायत प्राप्त होने पर, विसल ब्लोअर की सत्यापन की व्‍यवस्‍था करेगा।
  2. प्राप्त सभी खुलासे संबंधित सूचना का रिकार्ड अनुबंध-II ए तथा बी में रखा जाएगा।
  3. प्रत्येक प्रकटीकरण कार्रवाई को नोट किया जाएगा और उसे समीक्षा प्राधिकारी के समक्ष शिकायत प्राप्त होने के 7 दिन के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा।
  4. प्रकटीकरण निरीक्षण की जानकारी से संतुष्ट होने पर ही   आवश्यक
  5. जांच के बाद ही प्रधान कार्यालय के सतर्कता विभाग की सहायता से शिकायत के संबंध में पुछताछ  की जाएगी। नामित अधिकारी को अन्य विभागों/कार्यालयों या आंचलिक से सहायता/समर्थन हासिल करने का तथा सतर्कता अधिकारियों को पूछताछ/जांच करने का अधिकार होगा।
  6. पूछताछ/जांच के दौरान  विसल ब्लोअर की पहचान का अधिकारियों को खुलासा नहीं किया जाएगा । यदिं विसल ब्लोअर से मामले में अतिरिक्त जानकारी एकत्र करने की आवश्यकता  हो तो , वह निर्दिष्ट सरकारी माध्यम से की जाएगी।
  7. किसी भी विषय के खिलाफ आयोजित किसी भी जांच/पुछताछ खुद आरोप नहीं लगाया जाएगा  , और तटस्थता के साथ तथ्य खोजने की प्रक्रिया में किसी भी अपराध की पूर्वधारणा के बिना किया जाएगा।

viii.  पूछताछ/जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और प्रभावित पक्ष को सुनवाई के लिए और निष्कर्षों पर लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाएगा।

  1. जांच/पूछताछ को पूरा करने के लिए दिनों की समय सीमा अनुमति दी जाएगी। मामले को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया तो  अंतरिम रिपोर्ट को अनिवार्य रूप से अन्य बातों के साथ पूरा करने की अनुमानित तिथि के बारे में जांच अधिकारी. को सूचित किया जाना चाहिए।
  2. viii. प्रकटीकरण और इसकी आवश्‍यकता के आधार पर, नामित आधिकारी प्राथमिकता के आधार पर जांच कर इसको पूरा करने के लिए एक लघु समय सीमा तय करने का कदम उठा सकते है।.
  3. यदिं किया गया प्रकटीकरण मामले में विशिष्ट और सत्‍यापण योग्‍य नहीं है तो, . नामित आधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए अधिकृत किया जाएगा।   इसे योग्‍य रूप से दर्ज किया जाएगा . और समीक्षा प्राधिकरण के समक्ष रखा जाएगा।
  4. x. Inयदिं आरोपों  के प्रकटीकरण में लगाये गये आरोपों की पुष्टि होती है, तो    में सेवा शर्तों निर्धारित प्रावधानों के अनुसार उचित विभागीय कार्रवाई की जाएगी,    जिसकी खामियाँ सिद्ध होगी ऐसी संबंधित (अधिकारी/पंचाट) कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।

xiii.  ऊपर पैराग्राफ में बताये गये विषय/कर्मचारी के खिलाफ की गई कार्रवाई को शुरू किया जा सकता है,जो उसके विरूद्ध चलाये जा रहे अन्‍य किसी विषय/कर्मचारी के कार्रवाई या मुकदमा साथ-साथ चलता रहेगा।

स्‍थिति रिपोर्ट की समीक्षा

  1. योजना के कामकाज की समीक्षा समीक्षा प्राधिकरण द्वारा तिमाही आधार पर की जाएगी।
  2. नामित अधिकारी निर्धारित प्रारूप में (अनुबंध-III)   स्थिति रिपोर्ट और विसल ब्लोअर योजना के अंतर्गत प्राप्त खुलासे तथा संबंधित अन्य जानकारी को तिमाही आधार पर समीक्षा प्राधिकरण को प्रस्तुत करेंगे।   स्थिति रिपोर्ट में निम्नलिखित समावेश होगा-

क. वर्तमान और पूर्व की अवधि के दौरान प्राप्त   प्रकटीकरण की स्थिति . और उस पर

की गई कार्रवाई।

ख. कुछ विशेष क्षेत्र जिनपर b.ध्यान केंद्रित करने की आवश्‍यकता है।

ग. किए गए  खुलासों की प्रकृति, उनका अंलचवार वितरण।


समीक्षा प्राधिकारी उचित प्राधिकरण को भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक उपाय के रूप में सिफारिशें भेज सकते हैं।


नीति का कार्यान्वयन

. नीति की एक प्रति को एसबीएम नेस्‍ट में अपलोड किया जाएगा।  मुख्य सतर्कता अधिकारी और सतर्कता विभाग, प्रधान कार्यालय यह सुनिश्चित करेंगे किस भी कर्मचारियों की नीति से अवगत कराया गया है।

.इस नीति में बैंक द्वारा किसी भी समय परिर्वतन, संशोधन, निरस्‍त किया जा सकता है। यद्यपि, सतर्कता विभाग प्रत्‍येक वर्ष पॉलिसी की समीक्षा करेंगे जिसमें नामित अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारियों पर जोर दिया जाएगा।


अनुबंध-I

क्रम

संख्‍या


शिकायत दर्ज करने की तारीख


नामित अधिकारी के प्रयास



(नामित प्राधिकारी के उपयोग के लिए, इसके ऊपर कुछ भी न लिखें)


विसल ब्‍लोअर शिकायत फ़ॉर्म

सेवा में,

सहायक महा प्रबंधक (सतर्कता) ,

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर,

सतर्कता विभाग,

प्रधान कार्यालय,

बैंगलोर


. विसल ब्‍लोअर की व्यक्तिगत जानकारी

1.  नाम:

2. . कर्मचारी संख्‍या:

3.  शाखा का नाम:                                   Place: स्थान:

4. संपर्क नंबर (निवास)                            (O) (कार्यालय)

.   मोबाईल नंबर                               ईमेल पता

5. .शिकायत किए जाने के व्यक्ति(ओं) जिनके खिलाफ शिकायत की गई है:संलग्न शीट के अनुसार

6.  शिकायत का विवरण: संलग्न शीट के अनुसार


घोषणा

मैं घोषणा करता हूं कि बैंक की विसल ब्लोअर पॉलिसी के तहत मेरे द्वारा दी गई उपरोक्त जानकारी मेरे ज्ञान, जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य और सही है।


Signature हस्ताक्षर Date तारीख


ख. विसल ब्‍लोअर नीति के तहत प्राप्‍त रिपोर्ट में मामले के संक्षिप्त तथ्य


तथ्यों का विवरण: (यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त पृष्ठ लगाए)

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व्यक्ति (ओं) की  भूल/चूक के कृत्यों का ब्यौरा विवरण जिनके खिलाफ

प्रकटीकरण किया जा रहा है: (यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त पृष्ठ लगाए)

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इस प्रकटीकरण को पहले भी किसी के लिए किया गया था? यदि हाँ, तो कब और किसके लिए।

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अनुबंध-II

. विसल ब्‍लोअर शिकायत रजिस्‍टर जो कि गोपनीय है और केवल जो केवल नामित अधिकारी अर्थात एजीएम (संतर्कता) के उपयोग के लिए है


शिकायत   दाखिल तारीख


केस नंबर


विसल ब्‍लोअर

नाम

विसल

ब्‍लोअर का विवरण


शाखा

व्यक्ति

के विरूद्ध

सूचना दी गई


कोड संख्‍या


पहल/ उठाये गये कदम



बी . अनुवर्ती दर्ज


शिकायत दर्ज करने की तारीख


कोड संख्या

शाखा

व्यक्ति

जिसके विरूद्ध  सूचना मिली

शिकायत का संक्षिप्त विवरण


की गई कार्रवाई

की तारीख


की गई कार्रवाई का स्‍वरूप

मामला के बंद होने की तारीख


समीक्षा

प्राधिकरण को प्रस्तुत कार्रवाई रिपोर्टsubmitted to

Initialपहल/ उठाये गये कदम


अनुबंध-III

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर

सतर्कता विभाग

मुख्य सतर्कता अधिकारी

प्रधान कार्यालय ,


20मार्च/जून/सितंबर/20 दिसंबर

समाप्त तिमाही के लिए

विसल ब्‍लोअर नीति के तहत प्राप्त शिकायतों की स्थिति की रिपोर्ट


विसल ब्लोअर मामलों की समीक्षा

को शुरू प्राप्‍त

शिकायतों ofकी संख्‍या



तिमाही के दौरान प्राप्त

अस्वीकृत मामलों की संख्‍या


जांच शुरू की नहींकिये गये

मामलों की संख्‍या

लंबित मामलों की

संख्‍या



मामलों की संख्‍या जहां विसल ब्‍लोअर के विरूद्ध दूर्भावनापूर्ण कार्रवाई की गई


मामलों की संख्‍या जहां विसल ब्लोअर पॉलिसी के तहत कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई


विसल ब्लोअर पॉलिसी के तहत पता लगाये गये धोखाधड़ी के मामलों की संख्‍या


विसल ब्लोअर नीति के तहत सूचित बैंक के प्रमुख क्षेत्र


उन्‍होंने की हुई सुधारात्मक  कार्रवाई

  

विभाग

Placeस्‍थान

दिनांक                                                                         नामित प्राधिकारी के हस्ताक्षर

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15. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

 

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 <<< अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें ।

 

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत स्टेट बैंक ऑफ मैसूर के बारे में अपेक्षित जानकारी अधिनियम 2005 <<< अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें ।

भारतीय स्टेट बैंक (सहायक बैंक) अधिनियम 1959

सहायक बैंक सामान्य नियम, 1959

 

एसबीएम में नामित केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआई) <<< अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें ।

भारतीय स्टेट बैंक (सहायक बैंक) अधिनियम 2005 इसके अधिनियम में दिए गए मुआवजे की प्रणाली सहित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक ।

 

सभी शाखाओं की शाखा प्रबंधकों / शाखा प्रमुखों को एसीपीआईओ के रूप में नामित किया गया है । ये जनता से जानकारी हेतु आवेदन प्राप्त करेंगे और इसी को आवश्यक कार्रवाई हेतु केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी को अग्रेषित करेंगे ।

 

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 क्या है ?

 

सभी सार्वजनिक प्राधिकारी के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने हेतु सार्वजनिक प्राधिकारियों के नियंत्रण के तहत जानकारी का नागरिकों के सुरक्षित पहुँच हेतु सूचना का अधिकार के व्यावहारिक मुश्किलों को हटाने हेतु भारत सरकार ने ' सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ' अधिनियमित किया है ।

 

सूचना का अधिकार क्या है ?

 

' सूचना का अधिकार ' का अर्थ है, किसी भी सार्वजनिक प्राधिकारी द्वारा या उनके नियंत्रण के तहत जानकारी की पहुँच और इसमें कार्य, दस्तावेज़, रिकार्ड का निरीक्षण करने का, नोट करने का, दस्तावेज़ / रिकार्ड के सार या प्रमाणित प्राप्तियाँ लेने एवं सामग्री का प्रमाणित सैम्पल लेने एवं इलेक्ट्रोनिक रूप में भी संग्रहित जानकारी को प्राप्त करने का अधिकार भी सम्मिलित है ।

 

प्रकटीकरण से छूट प्राप्त जानकारी अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के तहत, जानकारी की कुछ श्रेणियों को नागरिकों से प्रकटीकरण की छूट दी गई है । जनता भी जानकारी हेतु आवेदन प्रस्तुत करने से पूर्व अधिनियम के संबंधित धाराओं का संदर्भ देख सकते है ।

 

कौन जानकारी पूछ सकते है ?

 

कोई भी नागरिक निर्धारित शुल्क के साथ अंग्रेज़ी / हिन्दी / क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा में लिखित या इलेख्ट्रोनिक माध्यम के जरिए आवेदन बनाकर जानकारी हेतु अनुच्छेद कर सकते है ।

 

जानकारी कौन देगा ?

 

  1. जनता से जानकारी हेतु आवेदन एसीपीआईओ (सहायक जन सूचना अधिकारी) प्राप्त करेंगे ।

 

  1. नियम के तहत अनुमत के अनुसार सभी प्रशासनिक इकाइयों / कार्यालयों के सीपीआईओ (केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी) जनता को आवश्यक जानकारी प्रदान करने की व्यवस्था करेंगे ।
  2. समय सीमा के भीतर, चाहे तो सूचना प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित अवधि की वैधता समाप्ति के 30 दिन के भीतर या निर्णय की प्राप्ति के 30 दिन के बाद, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी से जानकारी या अस्वीकृति के माध्यम से निर्णय नहीं मिलने पर कोई भी व्यक्ति, अपीलीय प्राधिकारी को अपील कर सकता है । सार्वजनिक प्राधिकारियों से यह भी अपेक्षित है कि अपीलीय प्राधिकारी के रूप में केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के रैंक से वरिष्ठ प्राधिकारी (प्राधिकारियों को नामित करें, जो अधिनियम के तहत अपेक्षित अनुसार केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील स्वीकार एवं निपटारा करेगा ।

 

लोक सूचना अधिकारियों की भूमिका

 

  1. सहायक केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी (एसीपीआईओ) एसीपीआईओ अधिनियम के तहत जानकारी हेतु आवेदन / अनुरोध या अपील प्राप्त करेंगे और मामले के अनुसार उसी को सीपीआईओ या अपीलीय प्राधिकारी को तुरंत अग्रेषित करें ।

 

  1. केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ)

केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी से अपेक्षित है कि अनुरोध की प्राप्ति के तारीख से 30 दिन की अवधि के भीतर या तो जानकारी प्रदान कर या अनुरोध अस्वीकार कर जानकारी प्रदान करने के अनुरोध की प्रक्रिया करें एवं निपटारा करें ।

 

  1. अपीलीय प्राधिकारी

अपीलीय प्राधिकारी अधिनियम के तहत अपेक्षितानुसार केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील स्वीकार एवं निपटारा करेंगे ।

 

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में जन सूचना अधिकारियों का स्ट्रक्चर

 

1)         शाखाओं में

 

  1. एसबीएम में नामित सहायक केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी (एसीपीआईओ)

 

सभी शाखाओं के शाखा प्रबंधक / शाखा प्रमुखों को एसीपीआईओ के रूप में नामित किया गया है । ये जनता से जानकारी हेतु अनुरोध प्राप्त करेंगे और इसी को आवश्यक कार्रवाई हेतु सीपीआईओ को अग्रेषित करेंगे ।

 

  1. एसबीएम में नामित केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ)

 

प्रत्येक शाखा में एक नियंत्रक होता है जो सामान्यत: उस क्षेत्र का क्षेत्रीय प्रबंधक होता है जिसके अंतर्गत वह शाखा आता है । शाखा के इन्कम्बेन्सि के आधार पर शाखाओं के सभी नियंत्रण जैसे क्षेत्र के स म प्र / मोड्यूल उ म प्र को केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है ।

 

  1. एसबीएम में नामित अपीलीय प्राधिकारी

 

सामान्य शाखाओं के लिए, शाखा की प्रकृति / इन्कम्बेन्सि के आधार पर नियंत्रक के नियंत्रण, सामान्यत: उ म प्र (मोड्यूल) महा प्रबंधक अपीलीय प्राधिकारी होंगे ।

 

2)         प्रधान कार्यालय में

 

  1. प्रधान कार्यालय में सहायक महा प्रबंधक (आरएफआईए) को केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है ।

 

  1. प्रधान कार्यालय में उप महा प्रबंधक (निरीक्षण) अपीलीय प्राधिकारी के रूप में ।

 

 

 

3)         आंचलिक कार्यालय में

 

प्रबंधक (कार्मिक) : एसीपीआईओ

मुख्य प्रबंधक, प्रशासन : सीपीआईओ

उप महा प्रबंधक (मोड्यूल) : अपीलीय प्राधिकारी

 

4)         उ म प्र के नेतृत्व की शाखाओं में

 

मुख्य प्रबंधक, लेखा : एसीपीआईओ

उप महा प्रबंधक (शाखा) : सीपीआईओ

नियंत्रक महा प्रबंधक : अपीलीय प्राधिकारी

 

(बैंक के वेबसाईट में " शाखा लोकेटर " शीर्षक से जनता सहायक केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारियों (एसीपीआईओ) की जानकारी / पता प्राप्त कर सकते है ।

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में जन सूचना अधिकारी का पता कैसे लगाएं ?

 

  1. जनता का सदस्य निकटतम एसीपीआईओ (निकटतम शाखा) में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है । शाखा लोकेटर के जरिए शाखा का पता लगाया जा सकता है ।)

 

  1. अगर अपील करना है, एसीपीआईओ, अनुरोध करने पर सीपीआईओ के किसी विशेष आदेश के संबंध में जिस विशिष्ट अपीलीय अधिकारी को अपील करना है, उनका विवरण प्रस्तुत करेंगे ।

 

शुल्क संरचना

 

  1. सूचना का अधिकार अधिनियम (आगे से ' अधिनियम ' कहा जाएगा) की धारा 6 के उप धारा (1) के तहत सूचना प्राप्त करने हेतु आवेदन उचित रसीद के साथ रोकड़ या डिमांड ड्राफ्ट या स्टेट बैंक ऑफ मैसूर को देय बैंकर चेक द्वारा दस रुपए (10/- रु.) के आवेदन शुल्क के साथ होना चाहिए ।

 

  1. अधिनियम की धारा 7 की उप धारा (1) के तहत जानकारी प्रदान करने हेतु, उचित रसीद के साथ रोकड़ या डिमांड ड्राफ्ट या निम्न दरों पर स्टेट बैंक ऑफ मैसूर को देय बैंकर चेक द्वारा नकद के माध्यम से वसूल किया जाएगा ।

 

  1. बनाए या प्रतिलिपि लिए गए प्रति पृष्ठ के लिए दो रुपए (ए–4 या ए–3 साइज पेपर में)
  2. वास्तविक शुल्क या बड़े साइज़ के पेपर में एक प्रति का लागत मूल्य
  3. वास्तविक शुल्क या नमूनों या मॉडलों का मूल्य, और
  4. अभिलेखों के निरीक्षण के लिए, पहले घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं, एवं तदनंतर हर पंद्रह मिनट (या उसके अंश) पाँच रुपए का शुल्क

 

  1. अधिनियम की धारा 7 की उप धारा (5) के तहत जानकारी प्रदान करने हेतु, उचित रसीद के साथ रोकड़ या डिमांड ड्राफ्ट या निम्न दरों पर स्टेट बैंक ऑफ मैसूर को देय बैंकर चेक द्वारा नकद के माध्यम से वसूल किया जाएगा ।

 

  1. डिस्केट या फ्लॉपी में प्रदान की जाने वाली जानकारी हेतु प्रति डिस्केट या फ्लॉपी के लिए पचास रुपए; एवं
  2. मुद्रित रूप में उपलब्ध कराई गई जानकारी के लिए ऐसे प्रकाशनों के लिए निर्धारित मूल्य या प्रकाशन के उद्धरण की प्रतिलिपि हेतु प्रती पृष्ठ दो रुपए

 

हालांकि, अधिनियम की धारा 7 की उप धारा 5 के अनुसार समुचित सरकार द्वारा निर्धारित किए गए गरीबी रेखा से नीचे वाले व्यक्तियों से कोई शुल्क नहीं किया जाएगा ।

 


 

 
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