State Bank of Mysore

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ड्रिप (टपकाऊ) सिंचाई
यह सिंचाई का एक प्रकार है जिसमें अपेक्षित जल- प्रमात्रा को प्रत्येक पौधे के जड में ड्रिपर द्वारा बूंद-बूंद डाला जाता है।  पाईप के नेटवर्क से दिया जाता है ताकि वृद्धि की अवधि में पौधे को कोई दिक्कत नहीं होती है।

ड्रिप (टपकाऊ) सिंचाई क्यों?
ड्रिप सिंचाई शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में किसानों को जहां पानी की कमी है, वरदान है।  ड्रिप की मुख्य विशेषताएँ हैं -
  • जल बचत 50-70%
  • श्रम एवं ऊर्जा की बचत 60-90%,
  • निम्न गुणवत्ता वाले जल का उपयोग,
  • उपज में 15-50% की वृद्धि,
  • पौष्टिकता का 30-60% तक बचत,
  • पहाडी इलाकें/ समस्याग्रस्त भूमि में उपयोग,

फसलें
इस प्रणाली को सभी पौधों के लिए उपयोग किया जा सकता है।  फिर भी, यह उच्च मूल्य बागवानी फसलें जिन्हें दूर तक फैलाया गया है, के लिए उपयुक्त है, जैसे - नारियल, बागान फसल, फल फसल, दवाई की फसल, मसाले, फूल इत्यादि,

ड्रिप प्रणाली के घटक
जल आपूर्ति पम्प, फिल्टर, उर्वरक मिलाने वाला टैंक, नियंत्रण प्रणाली, मुख्य व उपमुख्य लाईन, सूक्ष्म - टय़ूब, ड्रिपर।

इकाई लागत
विविध फसलों हेतु नाबार्ड द्वारा अनुमोदितानुसार।

आर्थिक सहायता
सभी किसानों हेतु ड्रिप सिंचाई उपकरण पर पूंजी आर्थिकी सहायता 50% तक बढा दी गयी है एवं अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के लिए 100% एवं बिजापुर जिलों में बागवानी हेतु।

पुनर्भुगतान

  • उपज फसल के मामले में, 11 महीने के रियायत अवधि के साथ 10-15 वर्ष।
  • नये पौधों के मामले में,  परिपछता/उपज की अवधि तक,
  • गन्ना के फसल के मामले में कटाई, विपणन के साथ 7 वर्ष।

छिडकाऊ सिंचाई
छिडकाऊ सिंचाई में, जल को हवा में उछाला जाता है और उसे भूमि/ फसल के जड में बारिश की तरह गिरने दिया जाता है एवं जल को इस तरह गिराया जाता है ताकि वह भूमिगत हो सकें।

सुविधाएँ :

  • भूमि/ फसल पर आधारित जल का 30-50% बचत।
  • भूमि स्तर खर्च में बचत/ढलाऊ भूमि की सिंचाई हो सकती है।
  • खेती खर्च में बचत (सिंचाई चैनलों हेतु भूमि की तैयारी)।  छिडकाऊ उपकरण एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर ले जाया जा सकता है।
  • श्रम की कमी,
  • उर्वरक का उपयोग (जल में घुलनशील)

असुविधाएँ :

  • आरंभिक लागत अधिक होगी (भूमिगत सिंचाई की तुलना में कुल आय अधिक होगी)
  • भूमि स्तर से बाष्पीकरण द्वारा आर्दता की कमी,
फसल,
वैसे तो यह प्रणाली सभी फसलों के लिए उपयुक्त है, फिर भी यह नजदीकी क्षेत्र में उगाये गये पौधों के लिए उपयुक्त है, जैसे - मक्का, तरकारी, गन्ना, मिर्च व बागान फसल जैसे - कॉफी, चाय एवं दालचीनी का इस्टेट एवं नर्सरी।  सूक्ष्म -स्प्रे जेट को ग्रीन हाउस में उपयोग किया जा सकता है।

योजना की लागत
नाबार्ड द्वारा अनुमोदित इकाई लागत के अनुसार।

आर्थिक सहायता
50% सभी किसानों के लिए एवं अनुसूचित जाति व जनजाति हेतु 100%।  कर्नाटक राज्य सरकार के बजट 2003-2004 द्वारा घोषितानुसार बिजापुर जिले में बागबनी फसल के लिए।

पुनर्भुगतान

  • 11 महीनों की शुरुआत अवधि के साथ 10-15 वर्षों तक।
  • नये फसलों के मामलों में, रियायत अवधि परिपक्वता तक दी जाती है।

फार्म मशीनीकरण -एस बी एम अग्री फार्म योजना

कृषि का मशीनीकरण कृषि के महत्वपूर्ण निविष्टियों में से एक है, जिससे फार्म परिचालन को समय पर पूर्ण करना, उत्पादन को बढाना एवं मानव श्रम में कमी आती है।  कृषि में त्वरित वृद्धि के साथ, ट्रैक्टर व पावर टिल्लर जैसे उपकरणों के उपयोग में वृद्धि हुई है एवं इससे कृषि संबंधित श्रम समस्या से जुडने में भी आसानी हुई है।
हमलोग किसानों को ट्रैक्टरों/पावर टिल्लर शक्ति चालित हल आदि) की खरीद में भी मदद कर रहे हैं।  फिरभी, फार्म मशीनीकरण के अंतर्गत उधार को बढाने के लिए, हमारे बैंक ने निम्न
ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों के साथ ज्ञापन सम़झौता किया है।
 
ट्रेक्टर निर्माता कंपनी :

क) मेसर्स एस्कार्ट्स
ख) मेसर्स एच एम टी लिमिटेड
ग) मेसर्स टी ए एफ ई
घ) मेसर्स स्वराज
च) मेसर्स न्यू हालैन्ड ट्रैक्टर्स, (फोर्ड)
छ) मेसर्स एस ए एम ई ट्रैक्टर्स,
ज) मेसर्स इन्टरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालिका)
झ) मेसर्स एयशर ट्रैक्टर्स
ट) मेसर्स एल अण्ड टी जॉन डीरे प्राइवेट लिमिटेड,
ठ) मेसर्स बजाज टेम्पो लिमिटेड,
ड) मेसर्स महिंद्रा गुजरात ट्रैक्टर्स,
ढ) मेसर्स महिंद्रा एण्ड महिद्रा लिमिटेड,
त) मेसर्स स्टैण्डर्ड कंबाइन्स (प्राइवेट) लिमिटेड,
थ) मेसर्स इंडो फार्म ट्रैक्टर्स,
द) मेसर्स एस ए एस मोटर्स लिमिटेड, (अंगद ट्रैक्टर्स)
ध) मेसर्स प्रीत ट्रैक्टर्स (प्रा.) लिमिटेड

पावर टिल्लर कंपनी
क) मेसर्स ग्रीव्स कॉटन लिमिटेड,
ख) मेसर्स बंगाल टूल्स लिमिटेड,  

ट्रैक्टरों के वित्तीयन हेतु मानक

एकडवार क्षेत्रफल
उधारकर्ता के पास 4 एकड गीली भूमि या 6 एकड शुष्क भूमि होनी चाहिए जिससे उन्हें मध्यावधि ऋण विस्तृत जा सकता है।  ऐसे किसानों को भी ट्रैक्टर हेतु वित्तीयन दिया जा सकता है जिनके पास नियत भूमि से कम हो बशर्तें उन्हें अन्य स्रोतों से आय प्राप्त होती हो।

ट्रैक्टर का आर्थिक उपयोग
ट्रैक्टर का कृषि कार्य में निम्नतम 1000 उत्पादन कार्य होना चाहिए चाहे उनके फार्म पर या सीमा भाडे पर या दोनों।
हिताधिकारियों द्वारा कम से कम तीन उपकरण होने चाहिए (या तो बैंक वित्त द्वारा या अपने निधि द्वारा)
सी एफ एम टी टी आई (केंद्रीय फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान), बुदनी, मध्य प्रदेश द्वारा जारी बी आई एस नीति के अनुसार, वित्तीयन किये गए ट्रैक्टरों का आवश्यक वाणिज्यिक परीक्षण रिपोर्ट होनी चाहिए।

मार्जिन राशि
नये ट्रैक्टरों हेतु फार्म मशीनीकरण के संदर्भ तत्काल अदायगी ट्रैक्टरों व उपकरणों के मामले में निवेश लागत का 10% से कम नहीं होगा।

ब्याज दर
11.50% प्रति वर्ष - सीमा को ध्यान रखे बिना।

पुनर्भुगतान अवधि
अधिकतम 9 वर्ष

ट्रैक्टर का पंजीकरण
ट्रैक्टर को संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारी के पास पंजीकृत किया जाना चाहिए।

बीमा
अपेक्षित आस्ति के संदर्भ में व्यापक बीमा आवर्त प्राप्त किया जाना चाहिए।  प्रथम वर्ष का प्रीमियम संदर्भित कंपनी डीलर द्वारा प्रदत्त किया जाएगा।

ट्रैक्टर्स का चयन
बैंक ट्रैक्टरों के वित्तीयन हेतु संभाव्य वैयक्तिक प्रस्तावों को वित्तीयन के लिए विचार कर सकता है पऱंतु ऐसे ट्रैक्टरों की पसंद व चुनाव वैयक्तिक हिताधिकारियों पर छोड देना चाहिए।

प्रतिभूति
बैंक के मानकों के अनुसार
क) ट्रैक्टरों का दृष्टिबंधक,
ख) भूमि का समान दृष्टिबंधक


स्वर्ण मित्रा योजना
The salient features of the scheme are presented below:
योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न प्रकार से दी गयी है -
यह योजना उनके तत्काल कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु आसान ऋण प्रदान करने हेतु है।
स्वर्णाभूषणों की गिरवी के प्रति ऋण।
ब्याज दरें कृषि नकद ऋणों के समान लागू होंगी।
कटाई मौसम के साथ भुगतान।
अग्रिम राशि रू.650/- प्रति ग्राम अधिकतम रु.5 लाख प्रति उधारकर्ता।


मैकृषिजेन

इस योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न प्रकार से हैं :
पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति हेतु योजना - जब भी आवश्यक है।
जेनेरेटर सेट खरीदने के लिए।
ए ई जेड, ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सभी किसानों को,
इकाई लागत
7.5 के वी ए के लिए
रू.40,000/-
10 के वी ए के लिए
रू.50,000/-

मार्जिन - 10%

अवधि - 3 वर्ष

पुनर्भुगतान
6 महीने की आरंभिक अवधि के साथ 10 तिमाही किस्तों में।


खीरा (गॉकिन) की खेती हेतु योजना

योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न प्रकार हैं :

कृषि निर्यात क्षेत्रों में रहे किसानों के लिए।

प्रति एकड रू.19,775/- वित्त की प्रमात्रा।

70 दिनों की लघु अवधि फसल है।

के सी सी के अंतर्गत अग्रिम पर विचार किया जा सकता है और पुनर्भुगतान को फसल के मौसम के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है।

तुमकुर, बेंगलूर (शहरीय व ग्रामीण), हासन, कोलार, चित्रदुर्गा, धारवाड व बागलकोट जिलों में अग्रिम दिया जा सकता है।


स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की नजदीक की शाखा या
मुख्य प्रबंधक
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
कृषि बैंकिंग विभाग
प्रधान कार्यालय, केंपेगौडा मार्ग,
बेंगलूर-560 009, भारत

दूरभाष: 9180 22353901 से 22353909, 22353473 विस्तरण 375,:22353460, फ्याक्स 9180 22283684
ई-मेल : This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it से संपर्क करें।
 
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